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Kurukshetra farmers: सूरजमुखी खरीद विवाद: शाहबाद मंडी के बाहर किसानों का फूटा गुस्सा, लाडवा रोड पर जाम

May 27, 2026 4:11 PM

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र की शाहबाद मंडी एक बार फिर किसान आंदोलन का अखाड़ा बन गई है। सूरजमुखी के ऊंचे उत्पादन के लिए मशहूर इस पट्टी में अपनी खून-पसीने की फसल को औने-पौने दामों पर बिकने से बचाने के लिए किसान सड़कों पर आ गए हैं। बुधवार सुबह भाकियू (चढूनी) के बैनर तले सैकड़ों किसान पहले मार्केट कमेटी के दफ्तर पहुंचे। वहां अधिकारियों के ढुलमुल रवैए और टालमटोल वाले जवाबों से नाराज होकर किसानों का सब्र टूट गया। देखते ही देखते किसान नारेबाजी करते हुए लाडवा रोड पर आ गए और सड़क के बीच दरी बिछाकर बैठ गए। जाम की खबर मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा है, लेकिन किसान किसी भी प्रशासनिक दिलासे को मानने को तैयार नहीं हैं।

प्रशासनिक आश्वासन हवा, सोमवार के टकराव के बाद भी नहीं निकला हल

शाहबाद में सूरजमुखी की खरीद को लेकर पिछले तीन दिनों से गतिरोध बना हुआ है। इससे पहले सोमवार को भी किसानों ने महापंचायत कर सांकेतिक रूप से हाईवे जाम करने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस ने कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया था। सोमवार देर शाम शाहबाद के उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDO/SDM) ने दखल देकर किसानों को भरोसा दिलाया था कि खरीद तुरंत शुरू करा दी जाएगी। लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी जब मंडी के कांटे चालू नहीं हुए, तो किसानों को लगा कि उनके साथ धोखा हुआ है। इसी गुस्से का नतीजा आज के इस बड़े चक्का जाम के रूप में सामने आया है।

केंद्र बनाम राज्य सरकार: तारीखों के फेर में फंसा अन्नदाता

इस पूरे विवाद के पीछे सरकारी तंत्र की आपसी खींचतान और तालमेल की भारी कमी साफ नजर आ रही है। हरियाणा सरकार ने बाकायदा अधिसूचना जारी कर प्रदेश में 25 मई से सूरजमुखी की सरकारी खरीद शुरू करने का एलान किया था। लेकिन तकनीकी पेंच तब फंसा जब केंद्र सरकार के नैफेड (NAFED) पोर्टल ने साफ किया कि उनके नियमों के मुताबिक खरीद 1 जून से पहले संभव नहीं है। अब आलम यह है कि सूरजमुखी की अगेती फसल कटकर तैयार है और किसान इस सरकारी असमंजस के कारण अपनी उपज को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लादकर मंडियों में रातें काटने को मजबूर हैं।

आढ़त पर अड़े व्यापारी; किसानों ने कहा- जब तक खरीद नहीं, तब तक जाम नहीं खुलेगा

इस त्रिकोणीय मुकाबले में तीसरा कोण मंडी के आढ़तियों का है, जिन्होंने अपनी अलग ही मोर्चाबंदी कर रखी है। आढ़तियों का दोटूक कहना है कि सरकार यदि उनकी आढ़त (कमीशन) को 2.5 प्रतिशत से कम करेगी, तो वे खरीद प्रक्रिया का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे। आढ़तियों की इस हठधर्मी और सरकारों की सुस्ती के बीच केवल और केवल आम किसान पिस रहा है। भाकियू नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक पहली ढेरी की सरकारी खरीद एमएसपी (MSP) पर शुरू नहीं हो जाती और आढ़तियों का विवाद नहीं सुलझता, तब तक शाहबाद की सड़कों से जाम नहीं हटाया जाएगा।

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