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कुरुक्षेत्र सुपर 100 में हड़कंप: बच्चों को बंधक बनाने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप, NHRC तक पहुंची शिकायत

May 28, 2026 3:01 PM

कुरुक्षेत्र। सरकारी संरक्षण में आईआईटी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कुरुक्षेत्र के बराना गांव स्थित 'सुपर 100 NGO' (स्केल) संस्थान विवादों के घेरे में आ गया है। हरियाणा की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता ढुल ने इस संस्थान के भीतर बच्चों के साथ होने वाले बर्ताव को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दरवाजा खटखटाया है। आयोग को भेजी गई आधिकारिक शिकायत में संस्थान के भीतर बच्चों को बंधक बनाकर रखने, उनका मानसिक उत्पीड़न करने और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर अमानवीय यातनाएं देने जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं। श्वेता ढुल ने मांग की है कि इस बंद परिसर के भीतर रह रहे बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति की जांच के लिए तुरंत एक स्वतंत्र केंद्रीय टीम भेजी जाए।

बंधकों जैसा सुलूक, कीड़ों वाला पानी और शौचालय पर पाबंदी?

श्वेता ढुल द्वारा मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई शिकायत में संस्थान के भीतर के जो हालात बताए गए हैं, वे रूह कपाने वाले हैं। आरोप है कि परिसर में रह रहे करीब 250 छात्र-छात्राओं के लिए महज 7 से 8 शौचालय चालू हालत में हैं, जिसकी वजह से बच्चों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। हद तो तब हो जाती है जब कई बार बच्चों को क्लास के दौरान लंबे समय तक टॉयलेट जाने की इजाजत तक नहीं दी जाती। इसके अलावा, बच्चों को जो पानी पीने के लिए दिया जा रहा है, वह बदबूदार है और उसमें कीड़े तैरते पाए गए हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि संस्थान ने अपनी बदनामी के डर से कुछ बच्चों पर दबाव बनाकर जबरन लिखित और वीडियो बयान रिकॉर्ड करवाए हैं ताकि सच को दबाया जा सके।

'मैं आजाद हो गया'—संस्थान से निकलते ही रो पड़े बच्चे

संस्थान के भीतर अनुशासन के नाम पर भारी मानसिक दबाव और शारीरिक हिंसा का खेल चलने का आरोप है। श्वेता ढुल का कहना है कि यहां पढ़ रहे कई बच्चों में गहरे डर और अवसाद के लक्षण देखे गए हैं। संस्थान की कैद से बाहर आए कुछ बच्चे तो इतने सहमे हुए हैं कि वे सामान्य तरीके से बात तक नहीं कर पा रहे हैं। एक वाकये का जिक्र करते हुए शिकायत में कहा गया कि गेट से बाहर निकलते ही एक छात्र रो पड़ा और उसके मुंह से निकला, "आज मैं आजाद हो गया।" परिजनों का आरोप है कि जब वे अपने बच्चों की ऐसी हालत देखकर उन्हें वापस घर ले जाना चाहते हैं, तो संस्थान प्रबंधन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के पत्रों और कड़े नियमों का हवाला देकर उन्हें डराता है और बच्चों को सौंपने से इनकार कर देता है।

जिला शिक्षा अधिकारी बोले- 'आरोप बेबुनियाद, नए माहौल का है असर'

इन तमाम गंभीर और संवेदनशील आरोपों पर जब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विनोद कौशिक से बात की गई, तो उन्होंने पूरी तरह से अलग तस्वीर पेश की। डीईओ ने बताया कि शिकायतें सामने आने के बाद उन्होंने पिछले दिनों खुद बराना स्थित इस स्कूल और हॉस्टल का औचक निरीक्षण (विजिट) किया था। उन्होंने कहा, "मैंने खुद बच्चों से अकेले में बात की है, परिसर में ऐसे कोई अमानवीय हालात नजर नहीं आए। यह संस्थान पिछले 3 साल से बेहतरीन काम कर रहा है।" अधिकारी ने तर्क दिया कि इस साल का नया शैक्षणिक सत्र बीते 13 मई से ही शुरू हुआ है। मुमकिन है कि दूर-दराज से आए कुछ बच्चे अभी होमसिकनेस (घर की याद) के कारण नए और कड़े अनुशासन वाले माहौल में ढल नहीं पा रहे हों। उन्होंने कहा कि अगर फिर भी किसी अभिभावक को कोई विशेष शिकायत है, तो वे सीधे उनके दफ्तर में आकर उनसे मिल सकते हैं।

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