Search

Tau Devi Lal Park: कुरुक्षेत्र का ताऊ देवीलाल पार्क हुआ बदहाल, प्रशासन ने अंदर ही बना दिया कचरे का डंपिंग जोन

Jun 01, 2026 11:11 AM

कुरुक्षेत्र। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए दुनिया भर में अपनी खास पहचान रखने वाले कुरुक्षेत्र जिले के सार्वजनिक पार्क इन दिनों व्यवस्था की मार झेल रहे हैं। प्रशासनिक अमले की बेरुखी का सबसे बड़ा उदाहरण शहर का ताऊ देवीलाल पार्क बना हुआ है। जो पार्क कभी कुरुक्षेत्र के फेफड़ों की तरह काम करता था और लोगों को शुद्ध ऑक्सीजन देता था, वह आज कुरुक्षेत्र नगर परिषद की लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। ईटीवी भारत की टीम ने जब इस मुख्य पार्क का जमीनी मुआयना किया, तो वहां की अंदरूनी तस्वीरें बेहद हैरान करने वाली और परेशान करने वाली निकलीं।

पिछले हिस्से में बना दिया 'डंपिंग यार्ड', सुबह की सैर हुई दूभर

रियलिटी चेक के दौरान पार्क की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। पार्क के मुख्य हिस्से और रास्तों पर तो सफाई व्यवस्था थोड़ी-बहुत संतोषजनक नजर आई, लेकिन जैसे ही टीम नेशनल हाईवे-44 से सटे पिछले हिस्से की तरफ बढ़ी, वहां का नजारा बेहद डरावना था। प्रशासन ने पार्क की चारदीवारी के भीतर ही गुपचुप तरीके से एक डंपिंग जोन विकसित कर दिया है। शहरभर का कचरा यहां डाला जा रहा है, जिससे उठने वाली भयंकर दुर्गंध ने यहां आने वाले बुजुर्गों, बच्चों और मॉर्निंग वॉकर्स का सांस लेना तक दूभर कर दिया है।

सफेद हाथी साबित हो रहे लाखों के प्रोजेक्ट्स, फव्वारे पड़े ठप

पार्क के सौंदर्यीकरण और जन-सुविधाओं को दुरुस्त करने के नाम पर पूर्व में जो लाखों रुपये पानी की तरह बहाए गए थे, वे अब मिट्टी में मिलते दिख रहे हैं। सैलानियों को आकर्षित करने के लिए जो फव्वारे लगाए गए थे, वे पानी की किल्लत और मेंटेनेंस न होने से महीनों से बंद हैं। कचरा प्रबंधन की पोल खुद टूटे हुए डस्टबिन खोल रहे हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कचरा पात्र टूटने की वजह से गंदगी पूरे परिसर में फैल रही है, जिससे स्वच्छ भारत अभियान के दावों की धरातल पर हवा निकलती दिख रही है।

स्टॉल के लिए बने आउटलेट्स बने आवारा पशुओं और झाड़ियों का डेरा

पार्क के दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों पर सैर करने वालों और पर्यटकों की सुविधा के लिए बेहतरीन आउटलेट्स (कियोस्क) तैयार किए गए थे। योजना थी कि यहां आने वाले लोगों को ताजे फल, जूस और जरूरत का सामान मिल सके और युवाओं को रोजगार मिले। लेकिन लालफीताशाही और अफसरों की सुस्ती के चलते सालों बाद भी इनका आवंटन नहीं हो सका। नतीजा यह है कि ये आलीशान ढांचे आज जर्जर हो चुके हैं, इनके चारों तरफ ऊंची-ऊंची कंटीली झाड़ियां उग आई हैं और यह असामाजिक तत्वों का अड्डा बनते जा रहे हैं।

'सिर्फ ऊपरी दिखावे में जुटा है प्रशासन', भड़के कुरुक्षेत्र वासी

पार्क में रोजाना आने वाले स्थानीय नागरिकों का गुस्सा प्रशासन के खिलाफ सातवें आसमान पर है। नियमित सैर करने वाले प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ वीआईपी मूवमेंट वाले रास्तों को चमकाकर ऊपरी वाहवाही लूटने में व्यस्त हैं। स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा, "हमें अंदाजा भी नहीं था कि जिस पार्क में हम सेहत बनाने आते हैं, उसके पिछले हिस्से को प्रशासन ने कचरा घर बना दिया है। अगर कुरुक्षेत्र के इस सबसे मुख्य पार्क का यह हाल है, तो बाकी कॉलोनियों के पार्कों की स्थिति समझी जा सकती है। सरकार को सिर्फ करोड़ों के नए प्रोजेक्ट्स का फीता काटने में दिलचस्पी है, उनके रखरखाव से किसी को कोई सरोकार नहीं है।"

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हो रही कुरुक्षेत्र की साख

कुरुक्षेत्र कोई आम शहर नहीं है, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हब है जहां महाभारत कालीन स्थलों को देखने देश-विदेश से सैलानी पहुंचते हैं। जब ये पर्यटक शहर के मुख्य ताऊ देवीलाल पार्क की ऐसी दुर्दशा देखते हैं, तो वे यहां से बेहद खराब अनुभव लेकर लौटते हैं। कुरुक्षेत्र की गरिमा को बहाल करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि नगर परिषद और जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आए। इस डंपिंग जोन को यहां से किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए, बंद पड़े फव्वारों को दोबारा चालू किया जाए और जर्जर हो रहे आउटलेट्स का पारदर्शी तरीके से आवंटन कर पार्क का पुराना स्वरूप लौटाया जाए।

You may also like:

Please Login to comment in the post!