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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह की धूम: राज्यपाल प्रो. असीम घोष ने 3000 छात्रों को बांटी डिग्रियां

Apr 04, 2026 4:52 PM

कुरुक्षेत्र। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक धरा पर स्थित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (KUK) का परिसर शनिवार को उस समय गौरवमयी क्षणों का गवाह बना, जब हजारों छात्र अपनी शैक्षणिक यात्रा का सबसे अनमोल दस्तावेज 'डिग्री' लेने के लिए पारंपरिक गाउन में जुटे। विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे हरियाणा के राज्यपाल और कुलाधिपति प्रो. असीम कुमार घोष ने करीब 3000 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब मंच पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू जैसी दिग्गज कानूनी हस्तियां मौजूद रहीं। राज्यपाल ने सबसे पहले पीएचडी के शोधार्थियों को डिग्रियां बांटी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

शिक्षा केवल आजीविका नहीं, देश की तस्वीर बदलने का माध्यम: प्रो. असीम घोष

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष के शब्दों में एक नई ऊर्जा और दिशा नजर आई। नए कुलाधिपति के रूप में अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठित और प्राचीन विश्वविद्यालय के मेधावी छात्रों के बीच होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। राज्यपाल ने दो-टूक शब्दों में कहा, "शिक्षा का उद्देश्य केवल एक डिग्री हासिल करना या नौकरी पाना भर नहीं है। असली शिक्षा वह है जो आपको समाज के प्रति संवेदनशील बनाए और देश के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को मजबूत करने के काबिल बनाए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के युवा ही भारत की प्रगति के असली सारथी हैं और उनके ज्ञान का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को मानद उपाधि, केयू की उपलब्धियों की सराहना

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश बिंदल को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए मानद उपाधि से सम्मानित किया। राज्यपाल ने अपने भाषण में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भी जमकर पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने न केवल हरियाणा बल्कि पूरे उत्तर भारत में शिक्षा की जो अलख जगाई है, वह काबिले तारीफ है। राज्यपाल ने उन अभिभावकों को भी बधाई दी जिनकी बरसों की तपस्या आज उनके बच्चों की डिग्री के रूप में फलीभूत हुई है।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर दिया जोर

प्रो. असीम कुमार घोष ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि डिग्री लेने के बाद अब आपकी असली परीक्षा जीवन के मैदान में शुरू होगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और देश की प्रगति में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। दीक्षांत समारोह के समापन पर छात्रों के चेहरों पर जहां अपनी मेहनत का फल मिलने की खुशी थी, वहीं राज्यपाल के प्रेरक शब्दों ने उनके भीतर समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा भी पैदा किया। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे आयोजन को भव्यता के साथ संपन्न कराया।

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