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वृद्ध आश्रम में अग्रवाल महिला विंग ने कराया ठाकुर जी को नौका विहार, भजनों पर झूमे बुजुर्ग

Jun 04, 2026 12:50 PM

लाडवा (कैलाश गोयल): लाडवा की अग्रवाल कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियों के लिए पहचानी जाने वाली श्री अग्रवाल सभा की महिला विंग ने इस बार पुरुषोत्तम मास की पूजा-अर्चना के लिए किसी मंदिर को नहीं, बल्कि समाज के उपेक्षित बुजुर्गों के आशियाने को चुना। बुधवार को महिला विंग की पदाधिकारी और सदस्य भारी संख्या में बाबा बंसी वाला वृद्ध आश्रम पहुंचीं। यहां उन्होंने आश्रम के एकाकीपन को दूर करते हुए बुजुर्गों के साथ मिलकर ठाकुर जी की अलौकिक नौका विहार लीला का आयोजन किया। कन्हैया की नाव को रंग-बिरंगे गुब्बारों और गेंदे के फूलों से बड़ी ही खूबसूरती के साथ सजाया गया था। जैसे ही भजनों का दौर शुरू हुआ, आश्रम में रहने वाले दादा-दादी और नानी अपनी उम्र का तकाजा भूलकर महिलाओं के साथ झूम उठे।

तीन साल में एक बार आता है यह 'पुण्य का अवसर'

भजन संध्या के बीच महिला विंग की प्रधान पूनम सिंगला ने इस आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हर तीन साल में आने वाला 'अधिक मास' या 'पुरुषोत्तम मास' आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक वरदान की तरह है। इस महीने में भगवान श्री हरि विष्णु की साधना, जप-तप और विशेषकर असहाय लोगों को दान देने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी सोच के साथ महिला विंग ने यह निर्णय लिया कि वे इस बार पुण्य कमाने के साथ-साथ समाज के उन बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरेंगी, जो परिवार के सुख से महरूम हैं। महिलाओं ने भगवान विष्णु के निमित्त दीपदान किया और सुख-समृद्धि की कामना की।

क्यों वर्जित हैं इस महीने में शादियां और मुंडन?

धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के हवाले से सभा की पूर्व प्रधान वीणा बंसल ने एक अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस पूरे महीने में सूर्य की कोई संक्रांति (राशि परिवर्तन) नहीं होती, जिसके कारण इसे बोलचाल की भाषा में 'मलमास' भी कहा जाता है। शुद्ध और शुभ ऊर्जा की कमी के चलते शास्त्रों में इस दौरान शादी-ब्याह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश या किसी नए व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक रहती है। हालांकि, यह समय भगवान की भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

सत्तू के प्रसाद और भंडारे के साथ संपन्न हुआ उत्सव

कार्यक्रम के अंतिम चरण में परंपरा के अनुसार सभी श्रद्धालुओं और आश्रमवासियों को सत्तू का विशेष प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद महिला विंग के सदस्यों ने अपने हाथों से परोसकर आश्रम के सभी बुजुर्गों को आदरपूर्वक भोजन कराया और उनका आशीर्वाद लिया। बुजुर्गों ने भी भावुक होकर कहा कि ऐसे आयोजनों से उन्हें यह अहसास होता है कि समाज उन्हें भूला नहीं है।

इस पूरे भक्तिमय और सेवाभावी आयोजन को सफल बनाने में समाजसेविका कृष्णा गोयल, रंजना गोयल, निर्मल गर्ग, नीला गर्ग, सुमन सिंघल, मोनिका अग्रवाल, रेनू सिंगल, रेखा गर्ग, अंजु गोयल, कांता, दीप्ति, शालू, सोनिया, वंदना, बबीता, सविता, रितु, शशि, सरोज, राजदुलारी, मनीषा और सुषमा सहित अग्रवाल समाज की दर्जनों प्रबुद्ध महिलाएं मुख्य रूप से उपस्थित रहीं।

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