Paddy Nursery Care: धान की पनीरी को 'बौने रोग' से कैसे बचाएं? पिहोवा के कृषि अधिकारी ने दी बड़ी चेतावनी
Jun 11, 2026 3:41 PM
पिहोवा। धान की बुआई का सीजन शुरू होते ही अन्नदाताओं के माथे पर फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं। इस बीच, पिहोवा के उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. मनीष वत्स ने किसानों को सचेत करते हुए धान की नर्सरी को 'व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर' (सफेद पीठ वाला टिड्डा) और 'राइस ड्वार्फ' यानी धान के बौने रोग के संभावित हमले से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण निवारक परामर्श (प्रिवेंटिव एडवाइजरी) जारी किया है। दरअसल, पिछले साल हरियाणा के कई जिलों में धान की फसल में बौने रोग ने जमकर कहर बरपाया था, जिससे सबक लेते हुए इस बार कृषि विभाग शुरुआती स्तर पर ही मुस्तैद नजर आ रहा है।
मक्के के खेत के पास भूलकर भी न बनाएं नर्सरी, खरपतवार से बनाएं दूरी
किसानों को व्यावहारिक सुझाव देते हुए डॉ. मनीष वत्स ने कहा कि इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सबसे पहले अपने खेतों की मेड़ों को बिल्कुल साफ-सुथरा रखें और खेत के आसपास जमा खरपतवार को तुरंत हटा दें। उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी नुक्ता साझा करते हुए कहा कि किसान भाई मक्के के खेतों के बिल्कुल नजदीक धान की पनीरी (नर्सरी) तैयार न करें। ऐसा इसलिए, क्योंकि मक्के की फसल में इस रोग को फैलाने वाले वाहक कीट (वेक्टर) भारी तादाद में पनपते हैं, जो वहां से सीधे उड़कर धान की नई और कोमल पौध पर हमला कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने खेतों में जरूरत से ज्यादा यूरिया या नाइट्रोजन का इस्तेमाल न करने और जलभराव वाले निचले इलाकों में नर्सरी लगाने से बचने की हिदायत दी है।
संक्रमित पौध दिखे तो तुरंत उखाड़कर जमीन में गाड़ें, बीजोपचार है रामबाण
कृषि अधिकारी ने जोर देकर कहा कि जिन किसानों ने अभी तक धान की नर्सरी नहीं डाली है, वे बुआई से पहले बीजों को मिट्टी और बीज जनित कीटों व रोगजनकों (पैथोजन्स) से बचाने के लिए अनुशंसित कीटनाशकों या जैव-कीटनाशकों से अच्छी तरह उपचारित (सीड ट्रीटमेंट) जरूर कर लें। उन्होंने कहा, "नर्सरी उगने के बाद किसान भाई रोजाना उसकी निगरानी करें। अगर शुरुआती चरण में ही कोई पौधा पीला, कमजोर या संक्रमित दिखाई दे, तो उसकी पहचान कर तुरंत जड़ से उखाड़ लें। ऐसे बीमार पौधों को खेत से काफी दूर ले जाकर मिट्टी में गहरा दबा दें, ताकि यह संक्रमण हवा या पानी के जरिए पूरी फसल में न फैल सके।"
कुरुक्षेत्र के खेतों पर दिल्ली की नजर, केंद्रीय टीम लगातार कर रही है औचक निरीक्षण
धान के इस संवेदनशील सीजन में कुरुक्षेत्र जिले के किसानों को तकनीकी रूप से मजबूत करने और फसलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए भारत सरकार भी गंभीर है। डॉ. वत्स ने बताया कि कृषि विभाग की एक विशेष केंद्रीय टीम लगातार कुरुक्षेत्र के ग्रामीण इलाकों का सघन दौरा कर रही है। इस उच्च स्तरीय टीम में डॉ. लक्ष्मीकांत कौशिक, डॉ. केपी शर्मा और डॉ. सुरजीत जैसे जाने-माने कृषि विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम समय-समय पर खेतों में जाकर सीधे किसानों से संवाद कर रही है और मिट्टी व पौधों के सैंपल ले रही है, ताकि समय रहते किसी भी बड़े संकट को टाला जा सके और इस बार धान की बंपर पैदावार सुनिश्चित की जा सके।