पिहोवा में गूंजा 'आत्मनिर्भर भारत' का नारा, भाजपा कार्यकर्ताओं ने निकाली प्रगति पथ यात्रा
Jun 13, 2026 4:53 PM
पिहोवा (अभिषेक पूर्णिमा)। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल नेतृत्व और सुशासन के 12 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी बिसात और जनसंपर्क को धार देना शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में पार्टी द्वारा देशव्यापी स्तर पर “12 साल — विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के” विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम के तहत पिहोवा के अंतर्गत आने वाले नेशनल हाईवे-152डी (ग्रीन फील्ड हाईवे) पर एक विशाल 'प्रगति पथ यात्रा' का आयोजन किया गया। इस यात्रा में इलाके के सैकड़ों उत्साही भाजपा कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
हाईवे पर भगवा रंग में रंगे नजर आए कार्यकर्ता
प्रगति पथ यात्रा के दौरान कुरुक्षेत्र जिला प्रभारी दीपक शर्मा और जिलाध्यक्ष तेजिंदर गोल्डी खैरा की अगुवाई में संगठन की एकजुटता साफ देखने को मिली। इस मौके पर भाजपा महिला मोर्चा पिहोवा मंडल अध्यक्ष गीता शर्मा, सारसा मंडल अध्यक्ष बाबू राम रुआ, बाखली मंडल अध्यक्ष सुखबीर इस्हाक, नरेश आर्य, सतपाल मास्टर, विशाल सौदा, सरपंच धनीरामपुरा विकल कुमार चौबे, गुलशन शर्मा और राकेश पुरोहित समेत कई प्रमुख चेहरे मंच और सड़क पर नजर आए। हाईवे पर राष्ट्र निर्माण के नारों के साथ कार्यकर्ताओं का काफिला आगे बढ़ा।
12 वर्षों में बदला देश का बुनियादी ढांचा: गीता शर्मा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष गीता शर्मा ने कहा कि यह सिर्फ एक यात्रा नहीं है, बल्कि पिछले 12 सालों में देश के भीतर हुए अभूतपूर्व बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल क्रांति और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण को समर्पित एक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि अंत्योदय की भावना के साथ काम करते हुए मोदी सरकार ने सुशासन को हकीकत में बदला है और आज भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
'विकसित भारत' के संकल्प को घर-घर ले जाएगी बीजेपी
नेताओं ने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि आगामी दिनों में संगठन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। गीता शर्मा ने साफ किया कि पार्टी का हर एक सिपाही केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 'प्रगति पथ यात्रा' के जरिए पार्टी ने न केवल अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि विकासोन्मुखी नीतियों के दम पर ही २०२६ और आने वाले समय में 'विकसित भारत' के सपने को साकार किया जा सकता है।