पिहोवा के अरुणाय मोड़ पर थमी राहगीरों की प्यास, आईटीआई के छात्रों ने लगाई ठंडे मीठे पानी की छबील
Jun 05, 2026 10:21 AM
पिहोवा (अभिषेक पूर्णिमा ) जून महीने की शुरुआत के साथ ही पूरा इलाका भट्टी की तरह तप रहा है। आसमान से बरसती आग और लू के थपेड़ों ने सड़कों पर चलने वाले मुसाफिरों, दुपहिया वाहन चालकों और रेहड़ी-फड़ी वालों का जीना मुहाल कर दिया है। इस भीषण उमस और गर्मी के बीच वीरवार को पिहोवा के अरुणाय मोड़ पर एक बेहद सुकून देने वाली तस्वीर सामने आई। यहां आईटीआई में पढ़ने वाले युवाओं ने अपनी जेब खर्च और अध्यापकों के सहयोग से एक विशाल छबील का आयोजन किया, जहां से गुजरने वाले हर शख्स को रोक-रोककर ठंडा और रूहअफ्जा युक्त मीठा पानी पिलाया गया।
सिटी थानाध्यक्ष ने बढ़ाया हौसला; बोले- "युवाओं की यह सोच प्रेरणादायक"
इस पुनीत कार्य की भनक जब स्थानीय पुलिस प्रशासन को लगी, तो युवाओं का हौसला बढ़ाने के लिए खुद पिहोवा सिटी थानाध्यक्ष मौके पर पहुँचे। उन्होंने अपने हाथों से राहगीरों को ठंडे पानी के गिलास बांटे और इस छबील का विधिवत उद्घाटन किया।
थानाध्यक्ष ने छात्रों की इस संवेदनशीलता की खुले दिल से तारीफ करते हुए कहा, "आज के दौर में जहां युवा सोशल मीडिया और रील बनाने में मसरूफ हैं, वहीं पिहोवा के इन छात्रों ने तपती धूप में सड़क पर उतरकर समाज सेवा की जो मिसाल पेश की है, वह वाकई काबिले-तारीफ है। गर्मी के इस मौसम में किसी प्यासे राहगीर को शीतल जल उपलब्ध कराना सबसे बड़ी इंसानी सेवा है। बाकी युवाओं को भी इनसे सीख लेनी चाहिए।"
गुरुजनों के मार्गदर्शन में छात्रों ने रच डाला 'सेवा का इतिहास'
छबील के प्रबंधन में जुटे छात्र बिट्टू ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही रिकॉर्डतोड़ गर्मी को देखकर उनके मन में कुछ करने का विचार आया था। जब उन्होंने यह बात अपने सहपाठियों और आईटीआई के शिक्षकों से साझा की, तो सभी ने तुरंत हामी भर दी। शिक्षकों के मार्गदर्शन और सभी छात्रों के आपसी अंशदान (कंट्रीब्यूशन) से इस छबील का खाका तैयार हुआ।
दोपहर की सबसे तेज धूप के वक्त अरुणाय मोड़ से गुजरने वाले सैकड़ों यात्रियों, रोडवेज बस के मुसाफिरों और राहगीरों ने रुककर ठंडे पानी से अपनी प्यास बुझाई और बच्चों के इस निस्वार्थ प्रयास को दुआएं दीं। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में करण, अभिषेक, शिवम, रोहित, सक्षम, अमन, समीर, सनी सहित संस्थान के अन्य छात्र और स्टाफ सदस्य सुबह से ही बर्फ तोड़ने और पानी बांटने की सेवा में डटे रहे।