अज्ञात वाहन की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, दुख की घड़ी में भी परिवार ने करनाल आई बैंक को सौंपी आंखें
May 28, 2026 4:33 PM
पिहोवा (अभिषेक पूर्णिमा): पिहोवा के नजदीकी गांव फूलगढ़ से मानवता की मिसाल पेश करने वाली एक बेहद भावुक खबर सामने आई है। यहां के रहने वाले 91 वर्षीय बुजुर्ग प्रीतम चंद इन्सां भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन जाते-जाते वे दो अंधेरी जिंदगियों को कुदरत का सबसे खूबसूरत तोहफा दे गए। पेशे से डेरा सच्चा सौदा के सेवादार रहे प्रीतम चंद की एक सड़क हादसे में असमय मौत हो गई थी। इस गहरे दुख के बीच भी उनके बेटों ने हौसला नहीं खोया और पिता की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके पार्थिव शरीर से नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा करवाया। करनाल के मधुबन स्थित अर्पणा आई बैंक की विशेष मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर उनकी आंखों को सुरक्षित आई बैंक में शिफ्ट किया।
सड़क हादसे ने छीनी जिंदगी, बेटों ने निभाया पिता का संकल्प
हादसे की जानकारी देते हुए मृतक के बेटों हरि सिंह, गुलजार सिंह और बलकार सिंह ने बताया कि बुधवार को उनके पिता पिहोवा शहर से किसी काम के बाद वापस अपने गांव फूलगढ़ लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में किसी अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। राहगीरों की मदद से उन्हें तुरंत पिहोवा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बेटों ने बताया कि उनके पिता ने जीते जी डेरा सच्चा सौदा के मानवता भलाई कार्यों के तहत मरणोपरांत नेत्रदान का फॉर्म भरा हुआ था। पिता को खोने के गम के बीच भाइयों ने तुरंत आई बैंक से संपर्क किया ताकि उनका यह संकल्प अधूरा न रह जाए।
'नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां पूरी तरह गलत'
आंखें सुरक्षित लेने पहुंचीं अर्पणा आई बैंक की डॉक्टर अनु ने इस मौके पर रूढ़िवादी सोच पर चोट की। उन्होंने कहा कि आज भी हमारे ग्रामीण समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं कि इस जन्म में आंखें दान करने से इंसान अगले जन्म में अंधा पैदा होता है, जो कि वैज्ञानिक और तार्किक रूप से सरासर झूठ है। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्था से जुड़े लोग लगातार नेत्रदान और देहदान जैसे पुनीत कार्यों के लिए आगे आ रहे हैं, जो समाज के लिए एक बानगी है। इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सतनाम सिंह विर्क भी पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे। उन्होंने कहा कि जहां आज के दौर में लोग रिश्तों को भूल रहे हैं, वहीं ऐसे सेवादारों का जज्बा वाकई सैल्यूट करने के काबिल है।
भरा-पूरा परिवार छोड़ गए पीछे, अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
नेत्रदान की धार्मिक और मेडिकल औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रीतम चंद इन्सां का उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। वे अपने पीछे एक बड़ा और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनकी धर्मपत्नी मंगती देवी, तीन बेटे, दो बेटियां विमला व गुलजारों, पुत्रवधुएं, प्रिंस और अक्षत समेत कई पोते-पोतियां और पड़पोते-पड़पोतियां शामिल हैं। उनकी अंतिम यात्रा में समाज सेवा से जुड़े राजेश चहल, संदीप अग्रवाल, रामपाल बटेड़ी, बाबा रामदास और बलजीत इस्माईलाबाद सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और डेरा श्रद्धालु शामिल हुए और नम आंखों से इस परोपकारी आत्मा को विदाई दी।