पढ़ो, बढ़ो, मुस्कुराओ: पिहोवा में रोटरी को-पायलट विंग का साक्षरता अभियान लाया रंग, समाज के लिए बनी मिसाल
May 27, 2026 1:28 PM
पिहोवा,(अभिषेक पूर्णिमा): कहते हैं कि अगर एक पुरुष पढ़ता है तो सिर्फ एक व्यक्ति साक्षर होता है, लेकिन जब एक महिला पढ़ती है तो पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है। इसी सोच को धरातल पर सच कर दिखाया है पिहोवा की रोटरी क्लब से जुड़ी महिलाओं ने। क्लब की को-पायलट विंग द्वारा समाज के वंचित तबके के लिए शुरू किया गया विशेष साक्षरता मिशन अब अपनी कामयाबी की कहानी खुद बयां कर रहा है। इसके तहत इलाके की ऐसी 12 महिलाओं और बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है, जो पहले अक्षरों की पहचान तक नहीं कर पाते थे।
महीने में दो दिन लगती थी विशेष क्लास
रोटरी क्लब के प्रधान डॉ. अमित अरोड़ा की धर्मपत्नी और इस मुहिम की अगुआ डॉ. दीपिका अरोड़ा ने बताया कि करीब एक साल पहले जब इस अभियान की नींव रखी गई थी, तब राह इतनी आसान नहीं थी। शुरुआत में महीने में दो दिन इन महिलाओं को पढ़ने-लिखने के लिए एक जगह एकत्र किया जाता था। घरेलू काम-काज के बीच समय निकालना इन महिलाओं के लिए भी चुनौती था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी रुचि बढ़ती गई। डॉ. दीपिका के मुताबिक, आज यह उनके लिए बेहद भावुक और गर्व का क्षण है कि जो महिलाएं पहले अंगूठा लगाती थीं, वे आज न सिर्फ अपने हस्ताक्षर कर रही हैं बल्कि रोजमर्रा का छोटा-मोटा हिसाब-किताब भी खुद संभाल रही हैं।
साक्षरता के साथ स्वच्छता का पाठ
क्लब ने इस अभियान को सिर्फ क ख ग सिखाने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे महिलाओं के सर्वांगीण विकास से जोड़ दिया। कार्यशालाओं के माध्यम से इन महिलाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। डॉक्टरों और महिला विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि बदलते मौसम और मासिक धर्म (महामारी) के दौरान लापरवाही बरतने से किस तरह की गंभीर बीमारियां घेर सकती हैं। इस जागरूकता सत्र के बाद क्लब की ओर से सभी महिलाओं को सैनिटरी पैड्स भी बांटे गए।
बच्चों को स्टेशनरी और कपड़ों की सौगात
अभियान की एक और सक्रिय सदस्य और क्लब के सचिव गौरव बंसल की धर्मपत्नी रितिका बंसल ने बताया कि नियमित तौर पर तय दिनों के अलावा भी जब समय मिलता था, बच्चों और महिलाओं को पढ़ाने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाती थीं। झुग्गी-झोपड़ियों और गरीब परिवारों के छोटे बच्चों का मन पढ़ाई में लगा रहे, इसके लिए उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ बिस्कुट, फल और पौष्टिक स्नैक्स दिए जाते थे। इसके अलावा बच्चों को स्कूल बैग, किताबें, कॉपियां, पेंसिल, पेन और नए कपड़े भी मुहैया कराए गए, ताकि संसाधनों की कमी उनके रास्ते का रोड़ा न बने। पिहोवा क्षेत्र में रोटरी क्लब की महिलाओं की इस अनूठी और प्रेरणादायक पहल की हर वर्ग द्वारा खुलकर सराहना की जा रही है।