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सोमवती अमावस्या पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में महास्नान; ब्रह्मसरोवर से ज्योतिसर तक गूंजे जयकारे

Jun 15, 2026 11:16 AM

ज्योतिसर (पवन शर्मा): सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर आज कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक भूमि पर श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। धर्मनगरी के प्रमुख तीर्थों, खासकर ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और भगवान श्रीकृष्ण की कर्मस्थली ज्योतिसर में तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे हजारों भक्तों ने सरोवरों के घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई। सुबह की पहली किरण के साथ ही पूरा कुरुक्षेत्र शंखनाद, घंटियों की आवाज और धार्मिक जयकारों से सराबोर हो उठा, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।

सोमवार और अमावस्या का दुर्लभ संयोग; पितृ तर्पण और मोक्ष के लिए उमड़े श्रद्धालु

सनातन परंपरा में जब भी अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में इस तिथि को 'सोमवती अमावस्या' के रूप में बेहद पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन कुरुक्षेत्र जैसे महातीर्थों में स्नान और दान करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी अटूट विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में डुबकी लगाने के बाद अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए घाटों पर तर्पण और विशेष अनुष्ठान किए।

कुरुक्षेत्र की मोक्षदायिनी माटी का महत्व, महाभारत और पुराणों में भी वर्णन

कुरुक्षेत्र को यूं ही धर्मक्षेत्र नहीं कहा जाता। महाभारत की यादों को समेटे इस पावन धरा पर पैर रखते ही श्रद्धालु खुद को धन्य मानते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्यग्रहण और सोमवती अमावस्या जैसे विशेष अवसरों पर कुरुक्षेत्र के सरोवरों में स्नान करने का फल अश्वमेध यज्ञ के समान होता है। ज्योतिसर में, जहां भगवान ने गीता का अमर संदेश दिया था, वहां भी श्रद्धालुओं ने वट वृक्ष के दर्शन किए और विश्व कल्याण के साथ-साथ अपने परिवार की सुख-समृद्धि की मन्नतें मांगी।

घाटों पर मुस्तैद रहा प्रशासन, सुरक्षा और सुविधाओं के रहे कड़े पहरे

लाखों श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए जिला प्रशासन और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। ब्रह्मसरोवर के घाटों पर गोताखोरों की तैनाती के साथ-साथ बैरिकेडिंग की गई थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। इसके अलावा, महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, पीने के पानी और चिकित्सा शिविरों की भी व्यवस्था की गई। तीर्थों की ओर आने वाले रास्तों पर यातायात को सुचारू रखने के लिए पुलिस बल मुस्तैद रहा, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन और स्नान करने में कोई बड़ी परेशानी नहीं हुई।

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