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भारतीय बाजारों में जल्द दिखेंगे प्लास्टिक के नोट? आरबीआई गवर्नर ने किया बड़ा खुलासा

Jun 06, 2026 12:11 PM

आने वाले समय में आपकी जेब में रखे रहने वाले करेंसी नोटों का रूप-रंग और उनका मिजाज पूरी तरह बदल सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) देश में 'पॉलिमर' यानी एक विशेष प्रकार के प्लास्टिक से बने नोटों को चलन में लाने की तैयारी कर रहा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात के साफ संकेत दिए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल इस पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन बैंक इसके नफे-नुकसान का गहराई से मूल्यांकन कर रहा है।

पानी में भी नहीं गलेंगे नोट, लाइफ होगी दोगुनी से ज्यादा

पॉलिमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनका टिकाऊपन है। भारत जैसे अत्यधिक आबादी और उच्च नकदी लेनदेन वाले देश में कागजी नोट बहुत जल्द मैले हो जाते हैं, फट जाते हैं या गल जाते हैं। इसके विपरीत, प्लास्टिक नोट नमी, पानी और गंदगी से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। अगर ये नोट गलती से कपड़ों के साथ वॉशिंग मशीन में भी धुल जाएं, तो भी इन पर कोई असर नहीं पड़ता। बैंकिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय में इससे सरकार का नोट छपाई का सालाना खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।

जाली नोटों के धंधे पर लगेगा परमानेंट ताला

सुरक्षा के मोर्चे पर पॉलिमर नोटों को अभेद्य माना जाता है। इन नोटों की बनावट और उन पर इस्तेमाल होने वाली उन्नत तकनीक के कारण इनकी हूबहू नकल तैयार करना जालसाजों के लिए लगभग असंभव होता है। इनमें ओपेक विंडो (पारदर्शी खिड़की) और ऐसे मैटेलिक फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं जो सामान्य कागज पर नहीं उभरते। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और सिंगापुर जैसे विकसित देश इस तकनीक की मजबूती को देखते हुए सालों पहले अपनी करेंसी को पूरी तरह प्लास्टिक (पॉलिमर) में तब्दील कर चुके हैं।

2014 का वो अधूरा प्रयोग और आज की चुनौतियां

भारत के लिए प्लास्टिक नोटों का यह विचार नया नहीं है। इससे पहले साल 2014 में भी केंद्र सरकार ने कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर जैसे पांच अलग-अलग जलवायु वाले शहरों में ₹10 के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल करने का एलान किया था। हालांकि, तब कुछ तकनीकी और व्यावहारिक अड़चनों के कारण इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब सबसे बड़ी चुनौती देश भर के बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने की है। अगर प्लास्टिक नोट आते हैं, तो देश के कोने-कोने में मौजूद एटीएम मशीनों के सेंसर और कैश ट्रे में बड़े बदलाव करने होंगे, क्योंकि प्लास्टिक नोटों का वजन और उनकी मोटाई कागजी नोटों से अलग होती है।

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