590 करोड़ का बैंक घोटाला: CBI ने दाखिल की पहली चार्जशीट, हरियाणा के सीनियर IAS से पूछताछ
May 22, 2026 11:32 AM
हरियाणा। हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन के सरकारी खातों से 590 करोड़ रुपये पार करने वाले इस संगठित सिंडिकेट के खिलाफ सीबीआई ने अपना पहला कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। वीरवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल की गई इस चार्जशीट में 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 मुलाजिम, 2 फर्जी (शेल) कंपनियां और उनके 3 निदेशकों सहित एक अन्य निजी व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर आपराधिक साजिश, जालसाजी, धोखाधड़ी, सबूत मिटाने और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत संगीन धाराएं लगाई गई हैं। फिलहाल ये सभी 15 आरोपी जेल की सलाखों के पीछे हैं।
टॉप ब्यूरोक्रेसी तक पहुंची आंच, एक सीनियर आईएएस से तीखे सवाल
इस मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब जांच की आंच हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गई। सरकारी खजाने से इतनी बड़ी रकम बिना किसी उच्च संलिप्तता के साफ हो जाए, यह सीबीआई के गले नहीं उतर रहा है। इसी सिलसिले में वीरवार को ही एक सीनियर आईएएस अधिकारी को तलब कर पूछताछ की गई, जो लंबे समय तक पंचायत विभाग के शीर्ष पद पर तैनात रहे थे। जांच एजेंसी यह कड़ियां जोड़ने में जुटी है कि जब विभिन्न महकमों के खातों से करोड़ों रुपये इधर-उधर किए जा रहे थे, तब प्रशासनिक स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई और क्या इसमें कोई मौन सहमति थी।
ये हैं घोटाले के मुख्य किरदार; पत्नी की कंपनी में भेजे 300 करोड़
सीबीआई ने इस पूरे खेल की परत-दर-परत खोलते हुए मुख्य किरदारों का कच्चा चिट्ठा सामने रखा है। साजिश का केंद्र बिंदु रिभव ऋषि को बताया गया है, जो पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 (चंडीगढ़) शाखा का मैनेजर था और बाद में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में चला गया। रिभव ने अपने तत्कालीन रिलेशनशिप मैनेजर अभय के साथ मिलकर फर्जी चेक तैयार किए। खेल यहीं नहीं रुका, अभय की पत्नी स्वाति सिंगला की कंपनी 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स' के खाते में घोटाले की करीब 300 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सीधे ट्रांसफर की गई। इस काले धन को सफेद करने यानी मनी लॉन्ड्रिंग के काम में स्वाति का भाई अभिषेक सिंगला भी बराबर का साझीदार रहा।
सरकारी विभागों के 'विभीषण' भी शामिल, ईडी का शिकंजा बरकरार
इस महाघोटाले में सरकारी विभागों के भीतर बैठे अफसरों ने भी अहम भूमिका निभाई। आरोपियों की सूची में हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के तत्कालीन डायरेक्टर (फाइनेंस) अमित दीवान का नाम शामिल है, जिन्हें मोटी रिश्वत के एवज में सरकारी फंड को निजी बैंकों में डायवर्ट करने के आरोप में पकड़ा गया था। इसके साथ ही हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के वित्त नियंत्रक राजेश सांगवान भी सीबीआई के रडार पर हैं। वहीं, धनशोधन के पहलुओं की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी समानांतर मोर्चा संभाल रखा है। रिभव ऋषि की 10 दिनों की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद वीरवार को पीएमएलए कोर्ट ने उसे एक और दिन के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया है ताकि पैसों के अंतिम छोर (Trail) का पता लगाया जा सके।