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Haryana News: रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद भी जारी नर्सों का विरोध, नर्सें बोलीं- माफी और एफआईआर तक जारी रहेगा आंदोलन

Jun 10, 2026 9:51 AM

पंचकूला: हरियाणा में महिला आयोग की पूर्व चेयरपर्सन रेणु भाटिया के एक विवादित बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उनके इस्तीफे के बाद भी शांत होता नजर नहीं आ रहा है। नर्सिंग समुदाय ने साफ कर दिया है कि केवल इस्तीफा देने से मामला समाप्त नहीं होगा। संगठन की मांग है कि रेणु भाटिया सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाए। कुरुक्षेत्र के एक अस्पताल में निरीक्षण के दौरान दिए गए बयान को लेकर नर्सिंग स्टाफ में भारी नाराजगी है। इसी मुद्दे पर हरियाणा के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का सिलसिला जारी है।

हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष विनीता ने बताया कि संगठन ने बैठक के बाद रेणु भाटिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार मानहानि का मुकदमा दायर करने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि नर्सिंग समुदाय की गरिमा और पेशेवर सम्मान को ठेस पहुंची है। ऐसे में केवल पद छोड़ देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संगठन चाहता है कि इस मामले में जवाबदेही तय हो और उचित कार्रवाई हो।

माफी मिलने तक जारी रहेगी हड़ताल

नर्सिंग एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा। संगठन का कहना है कि जब तक सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी जाती, तब तक विरोध जारी रहेगा। बुधवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक सरकारी अस्पतालों में सांकेतिक हड़ताल जारी रखने का फैसला लिया गया। इसके अलावा गुरुवार को पूरे दिन की हड़ताल का भी ऐलान किया गया है। इससे कई सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है।

एसोसिएशन की अध्यक्ष विनीता का कहना है कि फिलहाल रेणु भाटिया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं हुआ है। ऐसे में आंदोलन समाप्त करने का कोई कारण नहीं बनता। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती और संबंधित पक्ष अपनी टिप्पणी पर खेद व्यक्त नहीं करता, तब तक संगठन अपने आंदोलन को जारी रखेगा।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उठाए सवाल

नर्सिंग स्टाफ ने इस विवाद के साथ-साथ अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। संगठन का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्तर पर कई नर्सिंग अधिकारी रात की ड्यूटी अकेले करते हैं। उनके मुताबिक रात के समय सुरक्षा जोखिम और बढ़ जाता है। संगठन का दावा है कि एक महीने पहले महिला आयोग को नर्सिंग अधिकारियों की सुरक्षा संबंधी मांगों का ज्ञापन भी दिया गया था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

यह पूरा विवाद 7 जून को कुरुक्षेत्र स्थित लोकनायक जयप्रकाश सिविल अस्पताल के दौरे के बाद शुरू हुआ। अस्पताल में एक युवती से दुष्कर्म की घटना सामने आने के बाद रेणु भाटिया वहां निरीक्षण के लिए पहुंची थीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रशासन, प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ. साराह अग्रवाल और ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ से कड़ी नाराजगी जताई थी। इसी दौरान दिए गए एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद नर्सिंग संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

नर्सिंग स्टाफ के आंदोलन के चलते हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को जारी रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन नियमित कार्य प्रभावित हो सकते हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार, महिला आयोग और नर्सिंग संगठनों के बीच इस विवाद का समाधान किस तरह निकलता है और क्या आने वाले दिनों में हड़ताल समाप्त हो पाती है।

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