August 2, 2026

Panipat News: पानीपत की दो जुड़वा बहनों का ब्रिटेन में डंका, 16 की उम्र में विदेशी छात्रों को हराकर जीता चुनाव

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Panipat News: पानीपत की दो जुड़वा बहनों का ब्रिटेन में डंका, 16 की उम्र में विदेशी छात्रों को हराकर जीता चुनाव

16 की उम्र में विदेश में मनवाया लोहा, ब्रिटेन की संसद में गूंजी पानीपत की आवाज

Panipat News: हरियाणा की बेटियां आज हर क्षेत्र में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। पानीपत की रहने वाली दो सगी जुड़वा बहनों एंजेल अहलावत और सोफी अहलावत ने अपनी प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल कायम की है। महज 15 साल की छोटी उम्र में 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद दोनों बहनों ने 16 साल की उम्र में उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन (UK) का रुख किया। एंजेल ने यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ सरे से क्रिमिनोलॉजी एवं फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन की पढ़ाई शुरू की और देखते ही देखते वहां छात्र राजनीति का बड़ा चेहरा बन गईं।

चीन और यूरोपीय उम्मीदवारों को हराकर रचा इतिहास, इसरो से भी जुड़ा नाता

एंजेल अहलावत ने यूनिवर्सिटी ऑफ सरे में सोसाइटीज चेयर के चुनाव में चीन और यूरोप के प्रतिद्वंदियों को करीब 800 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी। इस पद पर रहते हुए उन्होंने करीब 16 हजार छात्रों और 150 से ज्यादा स्टूडेंट सोसायटियों की कमान संभाली। एंजेल ब्रिटेन की संसद ‘हाउस ऑफ लार्ड्स’ से लेकर लंदन में भारतीय उच्चायोग और हरियाणा विधानसभा तक में युवा नेतृत्व पर विचार रख चुकी हैं। वहीं उनकी जुड़वा बहन सोफी अहलावत एयरोस्पेस इंजीनियर बन रही हैं। सोफी का चयन इसरो के प्रतिष्ठित ‘आजादीसैट-2’ प्रोजेक्ट के लिए देशभर से चुनी गई 750 छात्राओं में हुआ था।

“विरोध का अधिकार है, लेकिन भाषा की मर्यादा जरूरी”, Gen Z को दी नसीहत

स्वदेश वापस लौटने पर दोनों बहनों ने देश के वर्तमान माहौल और छात्र आंदोलनों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। हाल के दिनों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताने का हक सबको है, लेकिन मर्यादा की सीमा लांघना सही नहीं है। उन्होंने युवाओं और खासकर ‘Gen Z’ से संवाद में सकारात्मकता और भाषाई गरिमा बनाए रखने की अपील की। एंजेल और सोफी ने पीएम मोदी के छात्रों से सीधे संवाद (परीक्षा पे चर्चा आदि) करने के प्रयासों की भी सराहना की।

खाकी और आयुर्वेद का मिला संस्कार, प्रदेशभर में हो रही तारीफ

हरियाणा से निकलकर सात समंदर पार अपनी अलग पहचान बनाना इन मासूम बहनों के लिए आसान नहीं था। एंजेल के मुताबिक अनजान देश में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने से सफलता मिली। बता दें कि दोनों बहनों के पिता नरेश अहलावत हरियाणा पुलिस में बतौर एसीपी (ACP) तैनात हैं, जबकि मां आयुर्वेद डॉक्टर हैं। परिवार से मिले अनुशासन और संस्कारों के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराने वाली इन दोनों बेटियों की उपलब्धियों पर आज पूरा हरियाणा गर्व महसूस कर रहा है।

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