पानीपत की नरायणा नहर में फरिश्ता बनकर कूदा सचिन, डूबते हुए परिवार के 5 सदस्यों को बचाया
Mar 22, 2026 2:14 PM
पानीपत। कहते हैं कि फरिश्ते आसमान से नहीं आते, वे हमारे बीच से ही निकलकर सामने आते हैं। पानीपत के नरायणा पुल पर बीती रात कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला। जब एक कार अनियंत्रित होकर अंधेरे में नहर में समा गई, तो वहां मौजूद 24 साल के सचिन छौक्कर ने एक पल की भी देरी नहीं की। अपने ट्रैक्टर को पुल पर ही खड़ा कर सचिन सीधे उफनती नहर में कूद गया। यह उसकी बहादुरी ही थी कि आज सौदापुर का एक पूरा परिवार सुरक्षित अपने घर लौट सका है।
रात का सन्नाटा और चीख-पुकार: कैसे हुआ हादसा?
सौदापुर निवासी दीपक अपने ससुराल शेखपुरा (गनौर) से पत्नी मंजू और तीन बच्चों के साथ कार में सवार होकर गांव वापस लौट रहे थे। रात करीब 8 बजे जब वे नरायणा पुल के पास पहुंचे, तो अचानक कार पर से नियंत्रण खो गया और गाड़ी सीधे नहर में जा गिरी। खुशनसीबी यह रही कि गिरते समय कार का पिछला हिस्सा पुल के पिलर से टकरा गया, जिससे पीछे का शीशा टूट गया। इसी टूटे शीशे ने परिवार के लिए उम्मीद की एक खिड़की खोल दी, लेकिन तेज बहाव और अंधेरे के बीच बाहर निकलना नामुमकिन लग रहा था।
पैर में लगी चोट, पर नहीं थमे कदम
नहर के पास से गुजर रहे सचिन ने जैसे ही कार को गिरते देखा, उसने अपनी जान जोखिम में डाल दी। नहर में छलांग लगाते समय सचिन के पैर में गंभीर चोट भी आई, लेकिन उसके सामने एक परिवार डूब रहा था। सचिन ने पहले एक-एक कर तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद वह दोबारा पानी के बीच गया और मंजू को बाहर लाया। अंत में उसने गाड़ी चला रहे दीपक को भी सुरक्षित किनारे पर खींच लिया।
समालखा पुलिस और ग्रामीणों ने थपथपाई पीठ
सूचना मिलते ही समालखा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों और वहां जमा राहगीरों ने जब सचिन की बहादुरी की कहानी सुनी, तो हर कोई दंग रह गया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस बहाव में अच्छे-अच्छे गोताखोर उतरने से कतराते हैं, वहां सचिन ने अकेले पांच लोगों को बचाकर चमत्कार कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने एक सुर में मांग की है कि ऐसे जांबाज युवाओं को जिला प्रशासन और हरियाणा सरकार की ओर से सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि समाज में नेकदिली का संदेश जा सके।