पंजाब में निजी स्कूलों की फीस पर बड़ा फैसला, फीस बढ़ाने की लिमिट तय, पिछले 3 सालों में बढ़ाई एक्स्ट्रा फीस वापस करनी होगी
Jun 03, 2026 3:34 PM
चंडीगढ़: भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के निजी स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सरकार एक नया कानून लाने जा रही है, जिसके तहत निजी स्कूलों को सालाना अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ाने की अनुमति होगी। सरकार का कहना है कि यह कदम अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
तीन साल की अतिरिक्त फीस लौटानी पड़ सकती है
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उन स्कूलों की भी जांच होगी जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है। यदि जांच में अतिरिक्त फीस वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित स्कूलों को अभिभावकों को अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी। सरकार का मानना है कि फीस निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है। इसी कारण पुराने मामलों की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर वित्तीय राहत देने की योजना बनाई गई है।
सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, स्टेशनरी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करने के मुद्दे पर भी सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों को आवश्यक सामग्री की जानकारी पहले से साझा करनी होगी, लेकिन अभिभावकों को खरीदारी के लिए किसी एक विक्रेता तक सीमित नहीं किया जा सकेगा। इससे परिवारों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सामग्री खरीदने का विकल्प मिलेगा।
सभी निजी स्कूलों पर लागू होंगे नए नियम
सरकार के अनुसार प्रस्तावित कानून राज्य के सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बोर्ड से संबद्ध संस्थान भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस संबंध में जल्द अध्यादेश लाया जा सकता है, जिसके बाद आगामी विधानसभा सत्र में इसे विधायी रूप दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पूरे राज्य में एक समान फीस नियमन व्यवस्था लागू करना है।
नए ढांचे के तहत निजी स्कूलों की वित्तीय गतिविधियों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों का नियमित ऑडिट कराया जाएगा ताकि फीस निर्धारण और अन्य शुल्कों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। सरकार विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की राय लेकर विस्तृत कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। इसके माध्यम से फीस, अन्य शुल्क और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा।
पुराने कानून में संशोधन की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार फीस नियमन से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में संशोधन करने जा रही है। इसके तहत निजी शिक्षण संस्थानों से संबंधित मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। सरकार का दावा है कि पूर्व में लागू किए गए कुछ प्रावधानों के कारण स्कूलों को फीस बढ़ाने में अधिक स्वतंत्रता मिल गई थी। अब नई व्यवस्था के जरिए फीस वृद्धि पर स्पष्ट सीमा तय की जाएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने अमृतसर में एक छात्रा की मौत से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों पर किसी भी प्रकार का अनुचित दबाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले कुछ समय में अभिभावकों और छात्रों की ओर से फीस, बकाया राशि, नो-ड्यूज प्रमाणपत्र और परीक्षा संबंधी दबाव को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं। सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।