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Punjab Hola Mohalla 2026: 4 मार्च से आनंदपुर साहिब में सजेगा खालसाई रंग, जानें पूरा इतिहास

Mar 01, 2026 12:52 PM

Punjab Hola Mohalla 2026: पंजाब की पवित्र धरती श्री आनंदपुर साहिब एक बार फिर खालसाई जाहो-जलाल और शौर्य के रंग में रंगने को तैयार है। आगामी 4 से 6 मार्च 2026 तक यहां सिख धर्म का प्रसिद्ध पर्व 'होला मोहल्ला' पूरे धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। होली के ठीक अगले दिन शुरू होने वाला यह तीन दिवसीय आयोजन सिर्फ एक त्योहार नहीं है। यह पंजाब के लोगों और दुनियाभर के सिखों के लिए साहस, सेवा और भाईचारे का सबसे बड़ा समागम है, जहां लाखों की संख्या में संगत नतमस्तक होने पहुंचती है।

1701 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी शुरुआत

होला मोहल्ला का इतिहास सीधे तौर पर खालसा पंथ की स्थापना और उसकी रक्षा से जुड़ा है। दसवें सिख गुरु गोबिंद सिंह जी ने वर्ष 1701 में इसकी शुरुआत की थी। उन्होंने आनंदपुर साहिब में सिखों को युद्धकला, अनुशासन और सैन्य अभ्यास के लिए एकजुट किया था ताकि कौम हर जुल्म का डटकर सामना कर सके। होली जहां आम लोगों के लिए सिर्फ रंगों का त्योहार है, वहीं होला मोहल्ला सिख कौम को उनके गौरवशाली इतिहास और अदम्य साहस की याद दिलाता है।

निहंग सिखों का हैरतअंगेज युद्ध कौशल

इस भव्य आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण निहंग सिंहों का शौर्य प्रदर्शन होता है। पारंपरिक नीले बाने और ऊंची दुमाला पगड़ी में सजे निहंग सिख जब श्री आनंदपुर साहिब की धरती पर उतरते हैं, तो पूरा माहौल वीर रस से भर जाता है। यहां निहंग सिंह गतका, तलवारबाजी, भाला चलाने और घुड़सवारी के ऐसे करतब दिखाते हैं कि देखने वालों की सांसें थम जाती हैं। यह खालसा फौज के उस अदम्य साहस का जीवंत सबूत है, जिसने मुगलों की विशाल सेना के छक्के छुड़ा दिए थे।

तख्त श्री केशगढ़ साहिब से निकलती है भव्य शोभायात्रा

होला मोहल्ला के दौरान पंजाब के सभी प्रमुख गुरुद्वारों में अखंड पाठ और कीर्तन दरबार सजते हैं। मुख्य आयोजन तख्त श्री केशगढ़ साहिब में होता है, जहां से पंज प्यारों की अगुवाई में एक विशाल और भव्य महल्ला (शोभायात्रा) निकाला जाता है। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और 'बोले सो निहाल' के जयकारे पूरे आनंदपुर साहिब को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं। संगत दूर-दूर से इस आलौकिक दृश्य का गवाह बनने और गुरु घर की खुशियां प्राप्त करने पहुंचती है।

लंगर की अद्भुत परंपरा और समानता का संदेश

होला मोहल्ला केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह सिख धर्म के मूल सिद्धांत यानी सेवा का सबसे बड़ा उदाहरण भी है। इन तीन दिनों में आनंदपुर साहिब पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर लगाए जाते हैं। यहां अमीर और गरीब का हर भेद खत्म हो जाता है और सभी लोग एक ही पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह आयोजन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आम आदमी को समानता, आपसी प्रेम और निस्वार्थ सेवा का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाता है।

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