Punjab Nikay Chunav Result : अकाली दल 71 और भाजपा महज 15 सीटों पर सिमटी
May 29, 2026 4:32 PM
पंजाब। पंजाब की स्थानीय सरकारों के लिए हुए इस चुनावी रण ने यह साफ कर दिया है कि सूबे की जनता फिलहाल किसी नए राजनीतिक प्रयोग के मूड में नहीं है। नगर निगम और नगर कौंसिल के इन नतीजों ने कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में जबरदस्त सेंध लगाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के 'काम के एजेंडे' के सामने विपक्ष का कोई भी पैंतरा काम नहीं आया। गांवों से लेकर कस्बों और शहरों तक आम आदमी पार्टी ने जो पैठ बनाई है, उसने पारंपरिक ताकतों को तीसरे और चौथे नंबर की लड़ाई में धकेल दिया है।
गिद्दड़बाहा और नाभा में जमीनी उलटफेर, बिखर गई कांग्रेस
इस चुनाव का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला राजनीतिक संदेश गिद्दड़बाहा से निकला है। यह इलाका कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राजा वडिंग का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन बदलाव की बयार में कांग्रेस का यह तंबू उखड़ गया। यहां कुल 19 वार्डों में से अब तक घोषित हुए सभी 13 के 13 वार्डों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया है। इसी तरह नाभा नगर कौंसिल में भी 'आप' ने 12 में से 6 सीटें जीतकर खुद को सबसे बड़ी ताकत के रूप में स्थापित किया है। यहां भाजपा, अकाली दल और कांग्रेस मिलकर भी सत्ताधारी दल की घेराबंदी करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए।
मुफ्त बिजली और रोजगार पर लगी मुहर, फीके पड़े वादे
पंजाब की कमान संभालने के बाद पिछले चार वर्षों में भगवंत मान सरकार ने मुफ्त बिजली, सरकारी स्कूलों का कायाकल्प, आम आदमी क्लीनिक, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और युवाओं को रोजगार देने जैसी जो नीतियां अपनाई थीं, उनका सीधा असर इस चुनाव में देखने को मिला है। वोटरों ने यह साफ कर दिया है कि वे अब परिवारवाद और कोरे वादों के पुराने राजनीतिक ढांचे से आगे निकलना चाहते हैं। यही वजह है कि अकाली दल और कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टियां अपने पारंपरिक गढ़ों को भी बचाने के लिए संघर्ष करती दिखीं।
क्या अब फाइनल की राह हुई आसान?
रुझानों और नतीजों के जो आंकड़े मालवा और सरहिंद पट्टी से आ रहे हैं, वे विपक्ष की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। बठिंडा जैसे संवेदनशील और बड़े सियासी हलके में आम आदमी पार्टी 80 से अधिक वार्डों में ऐतिहासिक बढ़त के साथ आगे बढ़ रही है। इन नतीजों ने विपक्षी दलों के सामने आत्ममंथन का एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है कि आखिर जनता उनसे लगातार दूरी क्यों बना रही है। फिलहाल, पंजाब के इस सियासी सेमीफाइनल का एक ही लब्बोलुआब है— मैदान में सिर्फ 'आप' का जादू चल रहा है और भगवंत मान की सरकार 2027 के फाइनल रण के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।