Punjab News: रिश्वत केस में सस्पेंड DIG भुल्लर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, CBI जांच में IAS-IPS का लिंक सामने आया
Apr 10, 2026 5:30 PM
चंडीगढ़: पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को रिश्वतखोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं है, क्योंकि मामले में अभी कई अहम गवाहों से पूछताछ बाकी है। कोर्ट ने यह भी माना कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पहले जमानत से इनकार करना सही था। फिलहाल भुल्लर चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में बंद हैं।
जांच पूरी होने से पहले राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले जमानत देने से केस पर असर पड़ सकता है। इसलिए इस समय आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर अगले दो महीने के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो भुल्लर दोबारा हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं।
CBI जांच में बड़े खुलासे
इस मामले में सीबीआई की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसी को ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पंजाब के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। इसके बाद सीबीआई ने अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।
मोबाइल और दस्तावेज जब्त करने की तैयारी
सीबीआई ने विशेष अदालत में अर्जी देकर मोबाइल, मूल दस्तावेज और नकदी कब्जे में लेने की अनुमति मांगी है। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच, व्हाट्सएप चैट और दस्तावेजों से कई वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क के प्रमाण मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि आरोपी अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत लेते थे।
गिरफ्तारी के बाद मिले करोड़ों रुपये और सोना
भुल्लर को 6 अक्टूबर 2025 को बिचौलिए कृष्णु शारदा के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उनके ठिकानों से करीब 2 किलो सोना और साढ़े 7 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। यह मामला पिछले साल दर्ज भ्रष्टाचार केस से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच अभी जारी है।
कई अफसरों के नाम जांच के दायरे में
सीबीआई की पूछताछ में 14 अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें 10 आईपीएस और 4 आईएएस अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा बिचौलिए के मोबाइल डेटा से करीब 50 अधिकारियों के लिंक सामने आए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग, आर्म्स लाइसेंस और एफआईआर से जुड़े मामलों में कथित रूप से प्रभाव डाला जाता था।