Punjab News: पंजाब एससी आयोग का सख्त रुख, रवनीत सिंह बिट्टू, बाजवा और राजा वड़िंग को 15 जून को तलब
Jun 04, 2026 1:48 PM
चंडीगढ़: पंजाब में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर चल रही बहस के बीच पंजाब अनुसूचित जाति आयोग ने केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इन नेताओं को 15 जून को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। यह कार्रवाई दो अलग-अलग मामलों से जुड़ी बताई जा रही है, जिनकी सुनवाई आयोग के समक्ष चल रही है।
केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को आयोग ने निर्धारित तारीख पर पेश होने के लिए कहा था। हालांकि वह व्यक्तिगत रूप से आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार उनकी ओर से एक वकील आयोग के समक्ष पहुंचे और मंत्री का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान बिट्टू की आयोग के अध्यक्ष से बातचीत भी करवाई गई, जिसमें उन्होंने व्यस्तता के कारण उपस्थित न हो पाने की जानकारी दी।
15 जून को फिर बुलाया गया
आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख 15 जून निर्धारित की है। आयोग चाहता है कि संबंधित पक्ष अपना पक्ष स्पष्ट रूप से उसके समक्ष रखें ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई आगे बढ़ सके। पंजाब में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े मामलों में आयोग की सक्रियता लगातार बढ़ी है। ऐसे मामलों में आयोग संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगता रहा है।
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को भी आयोग की ओर से नया नोटिस जारी किया गया है। दोनों नेताओं को भी 15 जून को आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग इन मामलों से जुड़े तथ्यों और बयानों की समीक्षा कर रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी से जुड़े मामलों पर फोकस
जानकारी के अनुसार आयोग कुछ सार्वजनिक टिप्पणियों और बयानों से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वर्ग या समुदाय की गरिमा प्रभावित न हो। इसी संदर्भ में संबंधित नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा गया है। आयोग मामले से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों का भी अध्ययन कर रहा है।
पंजाब की राजनीति में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से जुड़े प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आयोग की सुनवाई के बाद मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सभी की नजर 15 जून को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है।
पंजाब अनुसूचित जाति आयोग राज्य में अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े मुद्दों और शिकायतों की सुनवाई के लिए गठित वैधानिक संस्था है। आयोग समय-समय पर विभिन्न मामलों में संज्ञान लेकर संबंधित पक्षों को तलब करता है। अब 15 जून की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि आयोग के समक्ष रखे गए मामलों में संबंधित नेताओं की क्या दलीलें हैं और आयोग आगे क्या कदम उठाता है।