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रोहतक में सफाईकर्मियों की हड़ताल जारी, नेताओं की कोठियों के बाहर डाला कूड़ा

May 10, 2026 12:56 PM

हरियाणा। हरियाणा का 'पॉलिटिकल हब' कहा जाने वाला रोहतक शहर इन दिनों गंदगी और बदबू के साये में जीने को मजबूर है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल आज 10वें दिन में प्रवेश कर गई, लेकिन समाधान की कोई सूरत नजर नहीं आ रही। आलम यह है कि शहर के चौक-चौराहों से लेकर पॉश कॉलोनियों तक कचरे के पहाड़ खड़े हो गए हैं। अपनी मांगों को मनवाने के लिए कर्मचारियों ने अब आक्रामक रुख अपना लिया है; कहीं पुलिस थानों के सामने तो कहीं सत्ताधारी दल के नेताओं की कोठी के बाहर कचरे की ट्रॉलियां पलटकर रोष प्रकट किया जा रहा है।

चरमराई डोर-टू-डोर व्यवस्था, डंपिंग पॉइंट बने बीमारी का केंद्र

नगर निगम ने शहर की सफाई और घर-घर से कचरा उठाने का जिम्मा जिस निजी कंपनी को सौंप रखा है, उसकी गाड़ियां भी पिछले कई दिनों से नदारद हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि घरों में कूड़ा सड़ने लगा और लोग मजबूरन गलियों के कोनों पर कचरा फेंकने लगे हैं। पुराने आईटीआई मैदान स्थित डंपिंग पॉइंट की स्थिति तो और भी भयावह है, जहाँ कूड़ा सड़कों तक फैल गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही कचरा नहीं उठा, तो भीषण गर्मी के इस मौसम में महामारी फैलने का खतरा पैदा हो जाएगा।

'सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही'

नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान शंभू टांक ने दो टूक लहजे में कहा है कि उनका यह आंदोलन तब तक थमेगा नहीं, जब तक सरकार उनकी जायज मांगों को मान नहीं लेती। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें ₹5000 जोखिम भत्ता दिया जाए, साथ ही पेट्रोल और मोबाइल का खर्च भी विभाग वहन करे। इसके अलावा, सालों से सेवा दे रहे कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और हादसे का शिकार हुए फायर ब्रिगेड कर्मियों के परिजनों को सरकारी नौकरी व आर्थिक मदद देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।

समाधान की जगह सिर्फ आश्वासन

एक तरफ कर्मचारी सड़कों पर उतरकर व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम और जिला प्रशासन अब तक कोई ठोस बीच का रास्ता निकालने में नाकाम रहा है। शहर के व्यापारियों और आम जनता में इस प्रशासनिक विफलता को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि टैक्स लेने में निगम आगे रहता है, लेकिन जब शहर की बुनियादी सफाई की बात आती है, तो जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहते हैं। फिलहाल, रोहतक की जनता इस 'कचरा पॉलिटिक्स' के बीच पीस रही है और समाधान का इंतजार कर रही है।

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