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रोहतक: 5 रुपये में 5 गोलगप्पे की वो जिद, जिसने 9 लोगों को 12 साल तक कोर्ट में घसीटा, अब आया फैसला

Mar 13, 2026 12:47 PM

रोहतक। कहते हैं कि छोटी सी चिंगारी कई बार बड़ी आग का रूप ले लेती है, और रोहतक के महम में साल 2013 में कुछ ऐसा ही हुआ। महज एक गोलगप्पे के 'हिसाब-किताब' को लेकर शुरू हुई मामूली बहस ने ऐसा तूल पकड़ा कि खाकी वर्दी तक इसकी आंच पहुंच गई। मामला 21 मई 2013 का है, जब महम के राजीव चौक पर गोलगप्पे की एक रेहड़ी पर अनिल नाम का युवक अपने दोस्तों के साथ पहुंचा। रेहड़ी संचालक सूबे सिंह ने एक प्लेट में चार गोलगप्पे दिए, जिस पर अनिल बिफर गया। उसका तर्क था कि "बाकी तो 5 रुपये में 5 देते हैं, तुम 4 क्यों दे रहे हो?" बस, यही 'एक गोलगप्पे' की कमी 12 साल लंबी कानूनी जंग की वजह बन गई।

मारपीट से शुरू हुआ ड्रामा और लपेटे में आई पुलिस

गोलगप्पे की संख्या को लेकर शुरू हुई यह बहस देखते ही देखते गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई। रेहड़ी संचालक सूबे सिंह की शिकायत पर पुलिस ने अनिल और उसके साथियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब आरोपी अनिल ने पुलिस पर ही प्रताड़ना के गंभीर आरोप जड़ दिए। अनिल ने अस्पताल में मेडिकल करवाया और दावा किया कि पुलिस हिरासत में उसके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई। इसके बाद तत्कालीन थाना प्रभारी कुलदीप बेनीवाल (जो अब डीएसपी हैं), तत्कालीन चौकी इंचार्ज रामनिवास, एएसआई धर्मबीर, सुभाष और रेहड़ी संचालक समेत 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।

अदालत का फैसला: 12 साल बाद इंसाफ की जीत

बुधवार को रोहतक की अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल और दिलचस्प मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान केवल अपना काम करने के लिए निशाना बनाया गया था। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 12 साल की लंबी सुनवाई के दौरान कुल 15 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आखिरकार, कोर्ट ने डीएसपी कुलदीप बेनीवाल समेत सभी 9 लोगों को बरी कर दिया।

एक सबक: छोटी सी जिद और सिस्टम का बोझ

यह मामला हरियाणा के न्यायिक और पुलिस प्रशासन में एक मिसाल की तरह देखा जा रहा है कि कैसे एक मामूली सी बात (एक गोलगप्पे की जिद) अदालतों पर बोझ बढ़ा देती है। अनिल को इस मामले में पहले तीन साल की सजा भी सुनाई गई थी, लेकिन अब कोर्ट के नए फैसले ने पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। 12 साल तक चले इस ड्रामे के खत्म होने पर स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैसे एक 'एक्स्ट्रा' गोलगप्पा कई जिंदगियों और करियर के लिए सिरदर्द बन गया था।

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