IGNOU जून 2026 परीक्षा का काउंटडाउन शुरू: 10 अप्रैल तक भरें फॉर्म, जानें लेट फीस और जरूरी नियम
Mar 25, 2026 1:18 PM
दिल्ली। दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) के क्षेत्र में देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय, इग्नू ने जून 2026 सत्र की परीक्षाओं का बिगुल फूंक दिया है। उन लाखों विद्यार्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण समय है जो अपनी व्यस्त जीवनशैली या नौकरी के साथ अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सत्र की शुरुआत 1 जून से होगी, जिसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अब सुचारू रूप से शुरू हो चुकी है। एसएमडी कॉलेज और कमला राय महाविद्यालय जैसे प्रमुख केंद्रों के प्रोफेसरों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए समय रहते अपना पंजीकरण पूरा कर लें।
सावधानी ही सुरक्षा: एक बार फॉर्म भरा तो नहीं मिलेगा सुधार का मौका
इस बार इग्नू ने आवेदन प्रक्रिया को लेकर काफी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। छात्रों को चेतावनी दी गई है कि परीक्षा केंद्र (Exam Centre), विषय (Subject Code) और परीक्षा के माध्यम का चुनाव करते समय बेहद सावधानी बरतें। एक बार 'सबमिट' बटन दबने और फीस जमा होने के बाद, फॉर्म में किसी भी प्रकार के संशोधन या बदलाव की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया 'समर्थ पोर्टल' के जरिए संचालित की जा रही है, जहाँ प्रोजेक्ट सबमिशन से लेकर प्रैक्टिकल की जानकारी तक सब कुछ एक ही जगह उपलब्ध है।
लेट फीस का गणित: 10 अप्रैल के बाद ढीली करनी होगी जेब
इग्नू की समय सारणी के अनुसार, 10 अप्रैल तक फॉर्म भरने वाले छात्रों को केवल सामान्य परीक्षा शुल्क ही देना होगा। लेकिन यदि आप इस तारीख को चूक जाते हैं, तो 11 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच आवेदन करने पर आपको ₹1100 का अतिरिक्त विलंब शुल्क (Late Fee) भुगतना पड़ेगा। 24 अप्रैल के बाद पोर्टल को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और किसी भी विशेष परिस्थिति में फॉर्म स्वीकार नहीं होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को अपनी कोर्स वैलिडिटी (Validity) की जांच पहले ही कर लेनी चाहिए ताकि ऐन वक्त पर उनका साल खराब न हो।
रिजल्ट का इंतजार और प्रैक्टिकल की उलझन
यूनिवर्सिटी ने एक व्यावहारिक सलाह देते हुए छात्रों से कहा है कि वे दिसंबर 2025 टर्म-एंड परीक्षा का अपना परिणाम (Result) देखने के बाद ही जून सत्र के लिए विषयों का चयन करें। इससे छात्रों को यह स्पष्ट हो जाएगा कि उन्हें किन विषयों की दोबारा परीक्षा देनी है। वहीं, प्रैक्टिकल और लैब आधारित कोर्सेज के विद्यार्थियों के लिए हिदायत है कि वे अपने संबंधित 'रीजनल सेंटर' (Regional Centre) के लगातार संपर्क में रहें, क्योंकि प्रैक्टिकल परीक्षाओं का शेड्यूल और केंद्र स्थानीय स्तर पर ही तय किए जाते हैं।