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हरियाणा में पहली कक्षा के एडमिशन का नया नियम: 6 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं मिलेगा दाखिला

Mar 07, 2026 1:14 PM

चंडीगढ़ | हरियाणा में स्कूलों में पहली कक्षा के दाखिले को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने तय किया है कि अब 6 साल से कम उम्र के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह नियम 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पूरे प्रदेश में लागू होगा। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि नामांकन प्रक्रिया के दौरान नए नियम का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में हर साल बड़ी संख्या में छोटे बच्चों का दाखिला होता है। अब नए नियम के लागू होने के बाद माता-पिता को बच्चों की उम्र का ध्यान रखते हुए ही एडमिशन के लिए आवेदन करना होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार लागू होगा नियम

पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय करने का फैसला नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत लिया गया है। इस नीति के अनुसार पूरे देश में स्कूली शिक्षा के शुरुआती स्तर को एक समान बनाने की कोशिश की जा रही है।

पिछले कुछ वर्षों में इस नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा था। पहले जहां पांच साल की उम्र पूरी कर चुके बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश मिल जाता था, वहीं बाद में साढ़े पांच साल की उम्र पूरी करने की शर्त लागू की गई थी। अब नए सत्र से न्यूनतम आयु सीमा 6 वर्ष तय कर दी गई है।

शिक्षा विभाग ने जिलों को जारी किए निर्देश

हरियाणा के विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और खंड मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों में नामांकन के दौरान आयु सीमा से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।

आदेश में कहा गया है कि दाखिले की प्रक्रिया हरियाणा नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2011 के नियम 10 के तहत ही पूरी की जाए।

एडमिशन के लिए छह महीने की विस्तारित अवधि

नियमों के अनुसार स्कूल सत्र शुरू होने के बाद एडमिशन के लिए अधिकतम छह महीने की विस्तारित अवधि दी जाती है। इस अवधि के दौरान अगर कोई बच्चा 6 साल की उम्र पूरी कर लेता है तो वह उसी समय से पहली कक्षा में दाखिले के लिए पात्र हो जाएगा। यदि बच्चे का दाखिला इस अवधि में होता है तो स्कूल प्रबंधन की ओर से उसे पढ़ाई में बराबरी लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है।

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