Search

त्रिपुरा सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में होगा बंपर इजाफा

Mar 17, 2026 10:29 AM

त्रिपुरा। पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा से सरकारी मुलाजिमों के लिए राहत भरी खबर आई है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने राज्य के बजट सत्र के दौरान कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई भत्ता (DA) देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि राज्य की आर्थिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद, सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। यह बढ़ा हुआ भत्ता 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा, जिससे आने वाले महीनों में कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और पेंशनर्स की मासिक राशि में अच्छी-खासी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।

2 लाख परिवारों को मिलेगी महंगाई से राहत

सरकार के इस एक फैसले का सीधा असर त्रिपुरा के करीब 1 लाख 87 हजार परिवारों पर पड़ने वाला है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 1.05 लाख नियमित सरकारी कर्मचारी और लगभग 82 हजार पेंशनभोगियों को इस बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा।  गौरतलब है कि लंबे समय से कर्मचारी संगठन महंगाई के अनुपात में भत्ते बढ़ाने की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री साहा ने कहा कि बढ़ती कीमतों के बीच यह कदम मध्यम वर्गीय परिवारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा। सरकार के इस कदम के बाद अब राज्य और केंद्रीय कर्मचारियों के डीए के बीच का फासला घटकर 17 फीसदी रह गया है, जिसे भविष्य में और कम करने का भरोसा भी दिलाया गया है।

सरकारी खजाने पर पड़ेगा 500 करोड़ का बोझ

लोक-लुभावन फैसलों के साथ-साथ राज्य की वित्तीय स्थिति का प्रबंधन करना हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। अधिकारियों के मुताबिक, डीए में इस 5 फीसदी की वृद्धि को लागू करने के लिए त्रिपुरा सरकार को हर साल लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ कर्मचारियों की संतुष्टि पर ध्यान देना सरकार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने सदन में दोहराया कि उनकी सरकार 'कर्मचारी हितैषी' है और बजट की सीमाओं के भीतर रहते हुए हर संभव मदद जारी रखेगी।

कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर

जैसे ही मुख्यमंत्री ने सदन में डीए बढ़ोतरी का एलान किया, कर्मचारी संगठनों और पेंशनर एसोसिएशनों ने इसका स्वागत किया। विभिन्न संगठनों का कहना है कि होली के त्योहार के ठीक पहले यह घोषणा किसी बड़े गिफ्ट से कम नहीं है। हालांकि, कुछ संगठनों ने केंद्र के बराबर डीए लाने की मांग को दोहराया है, लेकिन फिलहाल 5 फीसदी की इस तात्कालिक राहत ने कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान जरूर ला दी है। बाजार विशेषज्ञों की मानें तो कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा पैसा आने से स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी नकदी का प्रवाह बढ़ेगा।

You may also like:

Please Login to comment in the post!