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यौन शोषण के मुकदमे में फंसे अविमुक्तेश्वरानंद बोले - गिरफ्तारी का विरोध नहीं करूंगा

Feb 23, 2026 9:05 PM

वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को कहा कि यौन शोषण के मुकदमे में अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती है तो वह उसका विरोध नहीं करेंगे। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप करने की मांग की है।

शंकराचार्य ने कहा कि जनता, स्वयं का हृदय और ईश्वर तीनों ही 'अदालतों' से उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है इसलिए उन्हें कोई भय नहीं है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य तथा दो-तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ अदालत के आदेश पर शनिवार देर रात किशोरवय लड़कों के यौन शोषण के आरोप में प्रयागराज के झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।

शंकराचार्य ने वाराणसी में संवाददाताओं से कहा कि अगर पुलिस उन्हें इस मुकदमे के सिलसिले में गिरफ्तार करती है तो वह इसका विरोध नहीं करेंगे, क्योंकि जो झूठ है वह अंत में साबित हो जाएगा। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके लिए तीन अदालतें हैं। उन्होंने कहा कि पहली अदालत जनता है जो सब देख रही है और वह अपना निर्णय देने वाली है। दूसरा न्यायालय मेरा हृदय है, हम जान रहे हैं कि हम गलत नहीं हैं। तीसरा और सर्वोच्च न्यायालय ईश्वर है। वह सब जानता है कि कौन गलत है और कौन सही। तीनों ही अदालतों से मुझे क्लीन चिट मिल चुकी है, इसलिए मुझे अब किसी का भय नहीं है।

शंकराचार्य ने कहा कि जो झूठ है वह अंत में सामने आ ही जाता है। उन्होंने कहा कि मेरे विरुद्ध जो कहानी गढ़ी गई है उसका सच आज नहीं तो कल, सबके सामने आ ही जाएगा। उन्होंने कहा कि माघ मेले के दौरान वह मेले में सीसीटीवी कैमरा और मीडिया के कैमरे के सामने रहे क्योंकि चप्पे-चप्पे पर प्रशासन द्वारा सीसीटीवी लगाया गया था। 

शंकराचार्य ने कहा कि आप लोग वह सीसीटीवी फुटेज निकलवाइये और उसमें देखिए कि मैं कहां था। दूसरा यह कहा जा रहा है कि हमारे गुरुकुल में यह सब हो रहा था। जबकि हमारे गुरुकुल में वे लड़के कभी पढ़े ही नहीं। उन्होंने कभी हमारे गुरुकुल में प्रवेश तक नहीं किया। उनके परीक्षा अंक पत्र से पता चलता है कि वे हरदोई के एक विद्यालय के छात्र हैं।

यदि सीडी है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा- शंकराचार्य

उन्होंने सवाल किया कि जब वे लड़के हमारे यहां पढ़ने नहीं हैं, कभी हमारे यहां आए नहीं हैं, यहां से कुछ लेना-देना नहीं है तब कैसे उनके साथ कोई कुछ कर सकता है? शंकराचार्य ने कहा कि एक भ्रम यह भी फैलाया जा रहा है कि आरोप लगाने वालों के पास मेरी किसी रिकॉर्डिंग की एक सीडी है, यदि सीडी है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?

आशुतोष महाराज की याचिका पर मुकदमा दर्ज 

कथावाचक स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज की याचिका पर अदालत ने शनिवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य आरोपियों पर दो किशोरवय लड़कों के यौन शोषण के आरोप में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद देर रात इस सिलसिले में शंकराचार्य उनके शिष्य तथा दो-तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखकर मांग की है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध दर्ज पॉक्सो मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए। राय ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि धार्मिक स्वायत्तता की संवैधानिक मर्यादा के संरक्षण के लिए यह बहुत जरूरी है।

अजय राय ने पत्र में कहा कि स्वामी जी ने पूर्व में महाकुंभ मेले में हुई भगदड़ के संदर्भ में राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से प्रश्न उठाए थे। इसके बाद उन्हें माघ मेले में स्नान से रोके जाने तथा उनके साथ आए बटुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाएं भी प्रकाश में आई, जिनकी व्यापक आलोचना हुई।

आपराधिक प्रक्रिया निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं राजनीतिक प्रभाव से पूर्णत मुक्त हो- उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय 

राय ने कहा कि यह स्पष्ट है कि आलोचना को दंडात्मक शक्ति से दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि उपरोक्त संवैधानिक सिद्धांतों के आलोक में अत्यंत आवश्यक है कि आपराधिक प्रक्रिया निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं राजनीतिक प्रभाव से पूर्णत मुक्त हो। कांग्रेस नेता ने कहा कि धार्मिक पद की गरिमा अथवा उसकी पात्रता को आपराधिक विवादों के साथ मिश्रित नहीं किया जाए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि प्रधानमंत्री जी यदि प्रशासन और आध्यात्मिक परंपरा के मध्य अनावश्यक टकराव की स्थिति है तो इससे व्यापक धार्मिक समाज में असंतोष एवं पीड़ा की भावना उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी आशंका का समय रहते निराकरण, लोकतांत्रिक संतुलन एवं सामाजिक सौहार्द की दृष्टि से आवश्यक है। 

राय ने प्रधानमंत्री से इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि यह विषय केवल एक व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि आस्था संवैधानिक अधिकारों और शासन की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश की जनता यह विश्वास चाहती है कि भारत में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को संरक्षण प्राप्त नहीं होगा।

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