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पत्रकारों के लिए 33 लाख तक की फ्री बीमा योजना, MWB ने लागू किए उपस्थिति के नए नियम

Jun 17, 2026 2:07 PM

यमुनानगर ( संजीव चौहान ) चंडीगढ़ से पत्रकारिता जगत और मीडियाकर्मियों के हित से जुड़ी एक बेहद अहम खबर सामने आ रही है। पत्रकारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन (MWB) रजिस्टर्ड की कार्यकारिणी बैठक में कई दूरगामी फैसले लिए गए हैं। संगठन ने साफ कर दिया है कि पत्रकारों का हित उनके लिए सर्वोपरि है, लेकिन इन विभिन्न निःशुल्क बीमा योजनाओं को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनाने के लिए अब कुछ नई और सख्त शर्तें जोड़ दी गई हैं।

संस्था के उत्तर भारत के उपाध्यक्ष पवन चोपड़ा ने इस नीतिगत बदलाव की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि एमडब्ल्यूबी अपनी स्थापना के समय से ही पत्रकारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहा है। संगठन सदस्यता शुल्क, रजिस्ट्रेशन फीस या फिर इंश्योरेंस के नाम पर पत्रकारों से एक भी रुपया नहीं वसूलता। संगठन की तमाम कल्याणकारी और सुरक्षा योजनाएं पात्र मीडियाकर्मियों को पूरी तरह मुफ्त (निःशुल्क) मुहैया कराई जाती हैं।

बिना जिलाध्यक्ष की संस्तुति के नहीं मंजूर होगा फॉर्म; कड़े किए गए नियम

नए नियमों के मुताबिक, अब जो भी पत्रकार साथी संगठन की सदस्यता या मुफ्त बीमा का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें आवेदन फॉर्म के साथ अपना अधिकृत अथॉरिटी लेटर अथवा वैध प्रेस आईडी कार्ड, पैन कार्ड और अपना पहचान पत्र संलग्न करना होगा। इसके अलावा, फर्जीवाड़े और अपात्र लोगों को बाहर रखने के लिए आवेदन प्रक्रिया को जिला स्तर पर जवाबदेह बनाया गया है। अब किसी भी पत्रकार का आवेदन संबंधित जिलाध्यक्ष की लिखित सिफारिश या अनुशंसा के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जिन जिलों में फिलहाल संगठनात्मक ढांचा तैयार नहीं है या जिलाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है, वहां एक विशेष तीन सदस्यीय अनुमोदन समिति की हरी झंडी आवश्यक होगी। इस एप्रूवल कमेटी में संगठन मंत्री मेवा सिंह राणा, महासचिव विनोद लाहोट और सह सचिव के.सी. आर्य शामिल हैं। फॉर्म पर इन तीनों में से किसी एक जिम्मेदार पदाधिकारी के हस्ताक्षर होना अनिवार्य कर दिया गया है।

सक्रियता से तय होगा बीमा का भाग्य: जानिए पूरा गणित

कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि मुफ्त बीमा योजनाओं का लाभ केवल कागजी सदस्यों को नहीं, बल्कि धरातल पर सक्रिय रहने वाले पत्रकारों को ही मिलेगा। इसके लिए बकायदा एक स्लैब तैयार किया गया है:

1 वर्ष पूर्ण न्यूनतम     50 प्रतिशत हाजिरी    10 लाख रुपये का मुफ्त एक्सीडेंटल इंश्योरेंस

3 वर्ष पूर्ण न्यूनतम     50 प्रतिशत हाजिरी     10 लाख रुपये का मुफ्त टर्म इंश्योरेंस

5 वर्ष पूर्ण    निरंतर सक्रिय सहभागिता 33 लाख रुपये तक का मुफ्त कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस

बैठक में यह भी साफ कर दिया गया कि जिन पत्रकारों को पहले से बीमा पॉलिसियां आवंटित की जा चुकी हैं, वे भी इस नियम से अछूते नहीं रहेंगे। यदि कोई सदस्य अपने राज्य या संगठन द्वारा आयोजित प्रांतीय कार्यक्रमों में 50 फीसदी हाजिरी दर्ज नहीं कराता है, तो अगले साल उसकी पॉलिसी के नवीनीकरण (रिन्यूअल) पर रोक लगाई जा सकती है या पुनर्विचार होगा।

पवन चोपड़ा ने दो टूक कहा कि संगठन का काम केवल खैरात में बीमा बांटना नहीं है, बल्कि संकट के समय पत्रकारों को एकजुट करना और सांगठनिक ताकत को मजबूत करना है। इसी वजह से सहभागिता को अनिवार्य किया गया है। इन नियमों की समीक्षा करने और अंतिम फैसला लेने के लिए एसोसिएशन के महासचिव डॉ. सुरेंद्र मेहता (यमुनानगर) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय हाई-पावर कमेटी बनाई गई है, जिसमें उपाध्यक्ष भुवनेश झंडई (रतिया) और कोषाध्यक्ष तरुण कपूर (अंबाला) शामिल हैं। यह कमेटी ही पात्रता और उपस्थिति के आधार पर आखिरी मुहर लगाएगी।

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