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यमुनानगर: कार बेचने के बाद भी नहीं बदला मालिक का नाम, उपभोक्ता आयोग ने CARS24 को सुनाया 62 हजार का जुर्माना

May 08, 2026 5:05 PM

यमुनानगर। अगर आप भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी पुरानी कार बेचकर निश्चिंत हो गए हैं, तो यह खबर आपकी आंखें खोल सकती है। यमुनानगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 'CARS24' (कार-24 सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी पाते हुए तगड़ा झटका दिया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 51 हजार रुपये का मुआवजा और 11 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में अदा करे। साथ ही, अगले 45 दिनों के भीतर कार का स्वामित्व नए खरीदार के नाम ट्रांसफर करने के निर्देश भी दिए हैं।

क्या था पूरा मामला?

रादौर की वीआईपी कॉलोनी के रहने वाले करण चानन ने अप्रैल 2021 में अपनी शेवरले क्रूज कार CARS24 के जरिए 1.50 लाख रुपये में बेची थी। कंपनी ने अपना सेवा शुल्क काटकर उन्हें 1,45,870 रुपये का भुगतान किया और बकायदा 'विक्रेता सुरक्षा नीति' (Seller Protection Policy) का हवाला देते हुए आश्वासन दिया कि 120 से 180 दिनों के भीतर आरसी ट्रांसफर कर दी जाएगी।

करण उस वक्त हैरान रह गए जब उन्होंने करीब ढाई साल बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक किया। कार न केवल उनके नाम पर दर्ज थी, बल्कि उसके नाम पर दो चालान भी कट चुके थे। बार-बार कंपनी के चक्कर काटने और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

कंपनी की दलीलें कोर्ट में हुई फेल

सुनवाई के दौरान CARS24 ने बचाव करते हुए तर्क दिया कि वे केवल एक मध्यस्थ (Middleman) हैं और कार को 'न्यू शिव मोटर्स' नामक डीलर ने खरीदा था, इसलिए आरसी ट्रांसफर की जिम्मेदारी डीलर की थी। हालांकि, आयोग ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग के सहायक रजिस्ट्रार नीरज वालिया के अनुसार, रिकॉर्ड से यह साफ था कि लेनदेन सीधे शिकायतकर्ता और CARS24 के बीच हुआ था। आयोग ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कंपनी अपनी जिम्मेदारी किसी तीसरे पक्ष या चैनल पार्टनर पर डालकर जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

लापरवाही पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

आयोग ने माना कि लगभग पांच साल बीत जाने के बाद भी वाहन का विक्रेता के नाम पर दर्ज रहना गंभीर लापरवाही है। इससे न केवल विक्रेता को कानूनी जोखिम रहता है, बल्कि यह उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो कंपनी को मुआवजे की राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इस फैसले को ऑनलाइन रिसेल मार्केट में काम करने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।

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