जाट समाज में कुरीतियों के खिलाफ सुधार की उठी आवाज़

Narnaul News: समाज की पहचान केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि समय की जरूरत को समझकर गलत परंपराओं को बदलने के साहस से बनती है। इसी सोच के साथ स्थानीय जाट सभा नांगल चौधरी में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक बार फिर बदलाव की आवाज बुलंद हुई।
बैठक में साफ संदेश दिया गया कि ऐसी रस्में, जो परिवारों पर आर्थिक बोझ डालें और सामाजिक दिखावे को बढ़ावा दें, उन्हें परंपरा के नाम पर ढोते रहना उचित नहीं है।जाट धर्मशाला में आयोजित बैठक की अध्यक्षता सभा के प्रधान कुलदीप जलदार ने की। बैठक में लैंड मॉर्गेज बैंक को भवन के तीन कमरे किराए पर देने सहित समाजहित के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। समाज की गतिविधियों और निर्णयों को प्रभावी ढंग से सामने रखने के लिए भीम सिंह सहरावत को प्रवक्ता नियुक्त किया गया।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मृत्यु भोज और सामाजिक समारोहों में लड़कियों द्वारा बांटे जाने वाले बर्तनों व अन्य उपहारों पर रोक लगाने से जुड़ा रहा। निर्णय लिया गया कि 20 सितंबर को होने वाली अगली बैठक में इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
कालबा गांव के वर्तमान एवं पूर्व सरपंचों ने इस सामाजिक मुहिम की शुरुआत अपने गांव से करने की इच्छा जताकर बदलाव की मशाल थामने का संदेश दिया। बैठक में उठी आवाज महज एक प्रस्ताव नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ चुनौती है जो खुशी और गम के अवसरों को भी दिखावे और खर्च की होड़ में बदल देती है। अगर यह पहल जमीन पर उतरती है तो इसका असर केवल एक समाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नई और सरल सामाजिक राह तैयार होगी।
वक्ताओं ने कहा, कुरीतियां परंपरा नहीं होतीं,’उन्हें बदलने का साहस ही असली समाज सुधार है।’ इस अवसर पर-जसवंत शेरावत सिरोही बहाली,कालबा के पूर्व सरपंच रामनिवास, लीलाराम,कुलदीप, सत्येंद्र व वर्तमान सरपंच प्रतिनिधि अशोक कुमार फौजी, उप प्रधान अभय सिंह गावड़ी जाट, कैशियर ईश्वर सिंह तोताहेड़ी, थानेदार ओमप्रकाश, कैप्टन धीरज, कैप्टन रणधीर, पूर्व प्रधान विजय सिंह बुढवाल, श्रीराम पूर्व सरपंच, अमर सिंह नसीर, राजेश नेहरा, मिश्रीलाल, धर्मपाल जागीरदार, रामकरण फौजी, पतराम श्योराण, संदीप शेरावत सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
