Search

अंबाला में गूँजे 'जय माता दी' के जयकारे: 300 साल पुराने माँ अंबिका देवी मंदिर में उमड़ी श्रद्धा की लहर

Mar 21, 2026 1:51 PM

अंबाला। जैसे ही चैत्र नवरात्रि का सूर्योदय हुआ, अंबाला की फिजाओं में शंख और घंटों की गूँज सुनाई देने लगी। शहर के गली-मोहल्लों से लेकर प्रमुख मंदिरों तक, हर तरफ बस 'जय माता दी' का उद्घोष है। नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री के पूजन के साथ ही श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र बना है—अंबाला का ऐतिहासिक माँ अंबिका देवी मंदिर। करीब तीन शताब्दियों से आस्था का स्तंभ बने इस मंदिर में आज तड़के 4 बजे से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। मान्यता है कि अंबाला शहर का नामकरण भी इसी मंदिर की अधिष्ठात्री देवी 'अंबा' के नाम पर हुआ था, जो इस स्थान को आध्यात्मिक रूप से और भी खास बनाता है।

पिंडी रूप में दर्शन और कोलकाता के फूलों से महका दरबार

मंदिर के मुख्य पुजारी जतिन शर्मा बताते हैं कि माँ अंबिका देवी साक्षात आदिशक्ति का स्वरूप हैं, जिन्होंने दुर्गम नामक राक्षस का संहार किया था। यहाँ देवी की पूजा प्रतिमा के बजाय 'पिंडी' रूप में की जाती है। इस बार नवरात्रि को लेकर मंदिर प्रशासन ने भव्य तैयारियां की हैं। माता के विशेष श्रृंगार के लिए खास तौर पर कोलकाता से ताजे और सुगंधित फूल मंगाए गए हैं। शाम की आरती के वक्त माता का सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) से दिव्य श्रृंगार किया जा रहा है, जिसे बाद में भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई प्राचीन चित्रकारी और वास्तुकला आज भी उस दौर की बेहतरीन कारीगरी की गवाही देती है।

कलश स्थापना और व्रत-अनुष्ठान का दौर

शहर के बाजारों में भी आज सुबह से ही रौनक देखते बन रही थी। श्रद्धालु पूजा की सामग्री, नारियल, चुनरी और माता के श्रृंगार का सामान खरीदते नजर आए। घरों में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की गई और अखंड जोत जलाई गई। श्रद्धालु राजेश डोगरा, जो कई दशकों से यहाँ माथा टेक रहे हैं, कहते हैं, "यह केवल एक मंदिर नहीं, हमारी पीढ़ियों का विश्वास है। माँ के दरबार में आकर जो शांति मिलती है, वह कहीं और नहीं।" वहीं, महिला श्रद्धालु रेखा देवी ने बताया कि वे हर साल पहले मंदिर में दर्शन करती हैं और उसके बाद ही घर पर कलश स्थापित कर नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेती हैं।

सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम

भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है। सेवादारों की टीमें श्रद्धालुओं को कतारबद्ध होकर दर्शन कराने में जुटी हैं। जगह-जगह पानी की छबील और भंडारों का आयोजन भी शुरू हो गया है। पुजारी जतिन शर्मा के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों तक माता का हर दिन अलग-अलग स्वरूप में श्रृंगार होगा और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। अंबाला का यह प्राचीन दरबार न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए भी आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बना हुआ है।

You may also like:

Please Login to comment in the post!