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बीजेपी प्रत्याशी के घर में ही छिड़ी जंग! अंबाला मेयर चुनाव में पति-पत्नी के विवाद ने बदला माहौल

May 03, 2026 1:58 PM

अंबाला (जग मार्ग)। हरियाणा में स्थानीय निकाय चुनाव की बिसात बिछते ही अंबाला की राजनीति में एक ऐसा 'फैमिली ड्रामा' शुरू हो गया है, जिसने सियासी समीकरणों को गौण कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मेयर पद की प्रत्याशी अक्षिता सैनी के खिलाफ किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि खुद उनके पति कुलदीप सैनी ने मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने चुनावी सरगर्मी को पारिवारिक कलह के चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। पति ने नामांकन पत्र में अपना नाम गायब होने और ससुराल पक्ष पर लगे आरोपों को लेकर अक्षिता को तीखे सवालों के घेरे में खड़ा किया है।

नामांकन पत्र में 'पति' का कॉलम खाली, कुलदीप ने पूछा— "तलाक कब हुआ?"

कुलदीप सैनी, जो पेशे से एक अध्यापक हैं, ने अपनी पत्नी अक्षिता के नामांकन फॉर्म को सार्वजनिक करते हुए सवाल उठाया कि इसमें पिता का नाम तो दर्ज है, लेकिन पति के कॉलम को खाली क्यों छोड़ दिया गया? कुलदीप ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, "अक्षिता बीजेपी से मेयर का चुनाव लड़ रही हैं, यह खुशी की बात है। लेकिन अगर मैं आपका पति नहीं हूं, तो हमारी सात साल की बेटी कहां से आई? हमारा कोई तलाक तो हुआ नहीं है, फिर सच्चाई को इस तरह क्यों छिपाया जा रहा है?"

ससुराल पक्ष पर शोषण के आरोपों को बताया 'पॉलिटिकल स्टंट'

अक्षिता सैनी द्वारा ससुराल पक्ष पर लगाए गए दहेज उत्पीड़न और मारपीट के आरोपों पर कुलदीप ने पलटवार करते हुए इसे पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि जब अक्षिता गांव में अपने सास-ससुर के साथ कभी रही ही नहीं, तो शोषण का सवाल ही कहां पैदा होता है? कुलदीप ने यह भी दावा किया कि शादी से पहले अक्षिता को 'हेयर लॉस' और सुनने में समस्या (हियरिंग लॉस) थी, जिसे उनसे छिपाया गया था, इसके बावजूद उन्होंने अक्षिता को स्वीकार किया और सालों तक खुश रखा। उन्होंने कहा, "मेरे पास उस दौर की सैकड़ों सेल्फी और खुशनुमा तस्वीरें मौजूद हैं, जो आपके दावों की पोल खोलती हैं।"

"आप मेयर बनकर सेवा करें, मैं जिला पार्षद बनकर"

दिलचस्प बात यह है कि कुलदीप सैनी खुद भी चुनावी मैदान में हैं और जिला पंचायत सदस्य के लिए ताल ठोक रहे हैं। उन्होंने अक्षिता को नसीहत देते हुए कहा कि चुनाव को चुनाव की गरिमा के साथ लड़ना चाहिए। "पारिवारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राजनीति के लिए दूसरे की छवि खराब करना शोभा नहीं देता। मैं एक समर्पित शिक्षक हूं और अपना समय कोर्ट-कचहरी में बर्बाद करने के बजाय बच्चों का भविष्य संवारना चाहता हूं।"

पिता का पलटवार: "कांग्रेस का मोहरा बन गए हैं दामाद"

इस पूरे विवाद पर अक्षिता के पिता स्वर्ण सिंह सैनी अपनी बेटी के बचाव में उतर आए हैं। उन्होंने कुलदीप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पिछले 6 साल से अक्षिता उनके पास रह रही है और तलाक का मामला कोर्ट में लंबित है। स्वर्ण सिंह ने आरोप लगाया, "6 साल में कुलदीप ने कभी अपनी बेटी की सुध नहीं ली। अब जब अक्षिता चुनाव लड़ रही है, तो वह कांग्रेस के हाथों की कठपुतली बनकर उसे बदनाम करने की साजिश रच रहा है। यह विपक्ष की चाल है ताकि मेयर की सीट पर बीजेपी को कमजोर किया जा सके।"

अंबाला में अब यह लड़ाई केवल वोटों की नहीं रह गई है, बल्कि दो परिवारों और आपसी रिश्तों के 'सच' के बीच उलझ गई है। शहर की जनता अब इस पारिवारिक दंगल और राजनीतिक दांव-पेंच के बीच अपना फैसला सुनाएगी।


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