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मां बनने का सपना हुआ साकार! सालों तक अस्पतालों के धक्के खाने के बाद रेवाड़ी में मिला सटीक इलाज

Mar 20, 2026 9:01 PM

रेवाड़ी . हरियाणा के रेवाड़ी और आसपास के जिलों में बांझपन (Infertility) की समस्या से जूझ रहे दंपतियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। रेवाड़ी स्थित बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ (Birla Fertility and IVF) सेंटर ने उन्नत चिकित्सा और सटीक जांच के दम पर अपने सफल संचालन के तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं। अपनी तीसरी वर्षगांठ के मौके पर इस अस्पताल ने एक ऐसा मेडिकल चमत्कार कर दिखाया है, जिसने दक्षिण हरियाणा के आम परिवारों में एक नई उम्मीद जगा दी है।

सालों तक अस्पतालों के चक्कर काटने वाले एक स्थानीय दंपति के घर 17 साल बाद आखिरकार किलकारी गूंज उठी है। 43 वर्षीय महिला पिछले 17 वर्षों से बांझपन का दंश झेल रही थी। इस दंपति ने बच्चा पाने की चाहत में कई आईवीएफ (IVF) सेंटरों में लाखों रुपये खर्च किए और तरह-तरह के इलाज आजमाए, लेकिन उन्हें हर जगह से केवल निराशा ही हाथ लगी।

डॉक्टरों की टीम ने ऐसे सुलझाया जटिल केस

लगातार मिल रही असफलता के बाद दंपति ने सटीक निदान के लिए रेवाड़ी के बिरला फर्टिलिटी सेंटर का रुख किया। यहां की विशेषज्ञ डॉ. प्राची बेनारा और डॉ. नंदिनी जैन की टीम ने जब इस महिला की गहराई से जांच की, तो एक बड़ी मेडिकल समस्या सामने आई। डॉक्टरों ने पाया कि महिला के गर्भाशय के भीतर गंभीर चिपकाव (Adhesions) पैदा हो गए थे।

यह पूरी स्थिति 'आशरमैन सिंड्रोम' (Asherman's Syndrome) से जुड़ी थी। अक्सर पुरानी डी एंड सी (D&C) जैसी सर्जिकल प्रक्रियाओं के बाद गर्भाशय की परत खराब हो जाती है, जिससे भ्रूण को ठहरने की जगह नहीं मिल पाती। इसी वजह से यह महिला इतने सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी।

पीआरपी थेरेपी और आधुनिक तकनीक का कमाल

इस जटिल मेडिकल प्रक्रिया को समझाते हुए बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. प्राची बेनारा ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने सबसे पहले 'हिस्टेरोस्कोपी' के जरिए गर्भाशय के इन चिपकावों को सावधानी से हटाया और उसकी संरचना को बिल्कुल सामान्य किया।

इसके बाद गर्भाशय की परत को मजबूत और बेहतर बनाने के लिए महिला को प्लेटलेट रिच प्लाज्मा (पीआरपी थेरेपी) दी गई। पूरी मेडिकल तैयारी और सटीक समय का ध्यान रखते हुए फ्रीज किया गया एम्ब्रियो (भ्रूण) सफलतापूर्वक ट्रांसफर किया गया। इस आधुनिक और सटीक इलाज का ही नतीजा है कि महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है। अब दक्षिण हरियाणा के आम लोगों को ऐसे गंभीर मामलों के इलाज के लिए बड़े महानगरों की तरफ नहीं भागना पड़ेगा।

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