ट्राईसिटी को 1463 करोड़ की सौगात: मोहाली-पंचकूला होंगे जाम मुक्त, शिमला का सफर भी होगा आसान
Feb 19, 2026
चंडीगढ़: केंद्र सरकार ने पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने चंडीगढ़ ट्राईसिटी क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए 1,463.95 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की है।
इस फंड से पंजाब में एक नया सिक्स-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह नया सड़क नेटवर्क मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला जैसे प्रमुख शहरों को सीधे तौर पर फायदा पहुंचाएगा। भारी ट्रैफिक को शहर के बाहर से निकालकर इस प्रोजेक्ट के जरिए आवाजाही को बहुत आसान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
जीरकपुर बाईपास से जुड़ेगा एनएच-205ए
यह नया कॉरिडोर नेशनल हाईवे 205ए के अंबाला-चंडीगढ़ सेक्शन को सीधे जीरकपुर बाईपास के साथ जोड़ेगा। यह निर्माण कार्य प्रस्तावित ट्राईसिटी रिंग रोड प्रोजेक्ट का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बनने से शहर के भीतर प्रवेश करने वाले उन भारी वाहनों पर रोक लगेगी, जिनका गंतव्य चंडीगढ़ शहर नहीं होता है और वे केवल शहर के बीच से होकर गुजरते हैं।
ट्राईसिटी के लोगों को जाम से मिलेगी मुक्ति
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को विशेष रूप से मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के शहरी जंक्शनों को जाम मुक्त करने के लिए डिजाइन किया गया है। मौजूदा समय में एनएच-44, एनएच-205ए और एनएच-152 के प्रमुख हिस्सों पर वाहनों के भारी दबाव और अंतरराज्यीय आवाजाही के कारण अक्सर लंबा जाम लग जाता है। यह नया कॉरिडोर इन प्रमुख राजमार्गों पर दबाव कम करेगा और ट्रैफिक के प्रवाह को पूरी तरह सुव्यवस्थित करेगा।
शिमला का सफर होगा तेज और आसान
शहरी क्षेत्र को ट्रैफिक जाम से राहत देने के अलावा यह अहम प्रोजेक्ट क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा। यह नया कॉरिडोर हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए तेज और सुगम यात्रा सुनिश्चित करेगा। गडकरी ने लिखा कि इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों और दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों, दोनों के ही समय की काफी बचत होगी।
उत्तरी भारत के आर्थिक विकास को मिलेगी रफ्तार
गडकरी ने कहा कि उन्नत बुनियादी ढांचे से माल और यात्रियों की तेजी से आवाजाही संभव हो सकेगी, जिससे इस पूरे क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण काफी मजबूत होगा। इस शानदार प्रोजेक्ट को उत्तरी भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने, शहरी विस्तार का समर्थन करने और समग्र परिवहन दक्षता में सुधार करने के लिए एक रणनीतिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।