- by Vinita Kohli
- Nov, 01, 2025 04:35
चंडीगढ़: आपने सुना तो होगा कि आज-कल महिलाएं हर काम में पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चलती आ रही हैं। भले ही बात खेल की हो या फिर शिक्षा, प्रशासन या किसी भी अन्य क्षेत्र की, महिलाएं सभी क्षेत्रों में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं। बराबरी इस हद तक पहुंच चुकी है कि अब महिलाएं साइबर ठगी जैसे अपराध में भी अपने तेवर दिखा रही हैं। ऐसा ही एक मामला चंडीगढ़ से सामने आया है, जहां चंडीगढ़ पुलिस के साइबर क्राइम थाना ने क्रेडिट कार्ड अपग्रेड के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जो फोन और व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को नामी क्रेडिट कार्ड कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को ठगी का शिकार बनाती थीं।
पुलिस के अनुसार, यह मामला सेक्टर-45, चंडीगढ़ निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे एक अज्ञात महिला का कॉल आया, जिसने खुद को अमेरिकन एक्सप्रेस क्रेडिट कार्ड विभाग की अधिकारी बताया। आरोपी महिला ने पीड़ित को उसके एसबीआई क्रेडिट कार्ड को अमेरिकन एक्सप्रेस कार्ड में बदलने और क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का लालच दिया। इसके बाद उसे एक फर्जी गूगल फॉर्म लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करते ही उसके मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच बना ली गई। कुछ ही देर में पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से ₹1,73,463 की राशि अवैध रूप से निकाल ली गई।
दिल्ली से संचालित हो रहा था साइबर ठगी रैकेट
जांच के दौरान साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और केवाईसी दस्तावेजों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि आरोपी दिल्ली के अशोक नगर और उत्तम नगर इलाकों से इस ठगी को अंजाम दे रही थीं। इसके बाद पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति लेकर पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में छापेमारी की, जहां से तीनों आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान प्रतिमा शर्मा, रोशनी और जूही सेठी के रूप में हुई है।
छापेमारी में दर्जनों मोबाइल, सिम और एटीएम कार्ड बरामद
गिरफ्तार आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। पुलिस ने 28 मोबाइल फोन, 82 सिम कार्ड, 55 एटीएम कार्ड, 2 आधार और 2 पैन कार्ड, 8 डोंगल, वायरलेस ट्रांसमीटर्स, 27 लैंडलाइन फोन, पासबुक, चेकबुक, नोटबुक और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के मोबाइल फोन में सैकड़ों लोगों के नाम, पते और मोबाइल नंबरों का डाटा मौजूद था, जिसका इस्तेमाल वे बैंक और क्रेडिट कार्ड अधिकारी बनकर लोगों को ठगने में करती थीं। कई मोबाइल फोन ऐसे बैंक खातों से जुड़े पाए गए, जिनका उपयोग ठगी की रकम को निकालने के लिए किया जा रहा था।
गिरोह के अन्य सदस्यों की जांच में जुटी पुलिस
लगातार पूछताछ के दौरान आरोपियों ने साइबर ठगी की वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और साथ ही अपने एक अन्य सहयोगी की भूमिका का भी खुलासा किया। फिलहाल पुलिस अन्य सहयोगियों की पहचान, फर्जी दस्तावेजों पर खोले गए बैंक खातों की जांच और अब तक कितने लोगों को ठगा गया, इसका पता लगाने में जुटी है।
मामले से लें सीख, ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत
साइबर क्राइम पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनियां कभी भी व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिए लिंक भेजकर कार्ड अपग्रेड या लिमिट बढ़ाने के लिए नहीं कहतीं। किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें और साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।