- by Vinita Kohli
- Nov, 01, 2025 04:35
चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) सीनेट चुनाव की घोषणा में हो रही देरी को लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा ने वीरवार को पीयू प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया कि यदि 25 नवंबर तक सीनेट चुनाव की तारीख घोषित नहीं की गई, तो 26 नवंबर को पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में सभी शैक्षणिक व प्रशासनिक गतिविधियों को बंद रखा जाएगा। मोर्चा ने ऐलान किया है कि अगला कदम पंजाब की अन्य संगठनों से समन्वय के बाद घोषित किया जाएगा। वहीं, पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा ने वीरवार को पीयू कैंपस में पंजाब की 60 से अधिक लोकतांत्रिक संगठनों और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई, जिसमें विभिन्न किसान संगठनों, छात्र इकाइयों और कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
मोर्चे से जुड़े प्रभजोत सिंह और नवप्रीत ने बताया कि 10 नवंबर के बाद की सभी घटनाओं और हालिया स्थितियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि सभी संगठनों ने एकमत होकर स्पष्ट किया है कि वे मोर्चे के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी भी तरह के दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं। बैठक की शुरुआत 10 नवंबर को हुए महाधरने के दौरान मंच प्रबंधन में हुई गड़बड़ी पर मोर्चा समन्वयकों के माफ़ी मांगने से हुई। इसके बाद सभी संगठनों को अब तक हुए विरोध, पीयू प्रशासन से की गई बैठकों और सीनेट चुनाव में देरी के मौजूदा हालात के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में उपस्थित सभी संगठनों ने केंद्र सरकार पर शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और केंद्रीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 इसी एजेंडे को आगे बढ़ाती है और पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट पर हो रहा हमला भी इसी व्यापक ढांचे का हिस्सा है।
प्रतिभागियों ने दोहराया कि पंजाब यूनिवर्सिटी का अस्तित्व पंजाब की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक पहचान से गहराई से जुड़ा है, इसलिए सीनेट पर किसी भी तरह का दखल अकादमिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला है। संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे को पंजाब बनाम हरियाणा विवाद के रूप में पेश करने की कोशिश की भी कड़ी आलोचना की। हरियाणा से आए प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि यह संघर्ष क्षेत्रीय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और शिक्षा की स्वायत्तता की लड़ाई है। बैठक में पंजाब भर में समन्वय बढ़ाने और आंदोलन को गांव-गांव व कॉलेजों तक फैलाने पर भी सहमति बनी।
मोर्चा ने एएफडीआर से जुड़े एडवोकेट अमन को मिली धमकियों की निंदा करते हुए कहा कि अब तक इस संबंध में एफआईआर न होना बेहद गंभीर मामला है। बैठक में शामिल संगठनों में प्रमुख किसान संगठनों—भाकियू (एकता-उगराहां), बीकेयू क्रांतिकारी, संयुक्त किसान मोर्चा, किसान-मजदूर मोर्चा सहित कई अन्य छात्र संगठनों (पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन, एआईएसएफ, एसएफआई, एआईडीएसओ) और कर्मचारी यूनियनों, युवा संगठनों व सामाजिक समूहों ने भाग लिया। पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा ने स्पष्ट कहा कि यह संघर्ष यूनिवर्सिटी की चारदीवारी का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों, शैक्षणिक स्वायत्तता और शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई है, और इसे और तेज किया जाएगा।
भाजपा दफ्तरों के घेराव की भी चेतावनी
मोर्चा नेताओं ने बताया कि पीयू प्रशासन ने 25 नवंबर तक चुनाव कार्यक्रम घोषित करने का भरोसा दिया है, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो 26 नवंबर को पूरा कैंपस बंद करने के साथ साथ 25 से 30 नवंबर के बीच पंजाब में भाजपा कार्यालयों के घेराव का भी प्रस्ताव रखा गया, ताकि केंद्र सरकार तक आंदोलन की आवाज़ मजबूती से पहुंच सके। नेताओं का कहना है कि आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें लगातार हो रही हैं, लेकिन मोर्चा पूरी तरह एकजुट है और ऐसी किसी भी तोड़फोड़ रणनीति का मजबूती से मुकाबला करेगा।
आज से शुरू होंगी सेमेस्टर परीक्षाएं
पंजाब यूनिवर्सिटी की ऑड सेमेस्टर परीक्षाएं, जो 18 नवंबर से शुरू होनी थीं, अब शुक्रवार से आयोजित की जाएंगी। सीनेट चुनाव की तारीखों की घोषणा में देरी पर आपत्ति जताते हुए ‘पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा’ ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि चुनाव तिथियां घोषित नहीं की गईं, तो परीक्षाओं का बहिष्कार किया जाएगा। मोर्चे के इस दबाव के चलते प्रशासन को 18, 19 और 20 नवंबर को निर्धारित सभी परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ीं। ऐसे में छात्रों को अब नई तिथि पर परीक्षा देनी होगी।