चंडीगढ़: सेक्टर-16 स्थित गवर्नमेंट मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (जीएमएसएच-16) में 27 जनवरी को दोबारा शुरू किए गए ड्रग डी-एडिक्शन एंड ट्रीटमेंट सेंटर का शुक्रवार को यूटी प्रशासन के स्वास्थ्य सचिव मंदीप सिंह बराड़ ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नशे से छुटकारा दिलाने के लिए मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान डायरेक्टर हेल्थ डॉ. सुमन सिंह और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। यह केंद्र 10 बेड्स के साथ चल रहा है, जबकि महिलाओं और विशेष जरूरत वाले मरीजों के लिए 2 अतिरिक्त बिस्तर भी रखे गए हैं। अब यह केंद्र नशे की लत से छुटकारा पाने के इच्छुक लोगों को भर्ती करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
निरीक्षण के समय स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक डॉ. सुमन सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। यहां भर्ती की प्रक्रिया आसान रखी गई है। सबसे पहले मरीज की मानसिक जांच की जाती है, ताकि यह समझा जा सके कि वह इलाज के लिए तैयार है या नहीं। भर्ती मरीज और उसके परिवार की लिखित सहमति से की जाती है। इलाज के दौरान मरीज के साथ परिवार का एक सदस्य रहना जरूरी है, ताकि उसे भावनात्मक सहारा मिलता रहे। वार्ड का माहौल साफ-सुथरा और सकारात्मक रखा गया है। मरीजों के लिए एक नियमित दिनचर्या बनाई गई है, जिसमें रात 10 बजे बत्ती बंद करने का नियम भी शामिल है, ताकि उनमें अनुशासन और अच्छी आदतें विकसित हों।
इलाज के साथ-साथ समूह में बातचीत, परामर्श और अन्य चिकित्सकीय गतिविधियां भी कराई जाती हैं। मरीजों को व्यस्त रखने के लिए अखबार, किताबें और खेल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। वार्ड में नशीले पदार्थ, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बाहर का खाना लाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जांच की जाती है। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने सुझाव दिया कि मरीजों के लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक पढ़ने की सामग्री भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। केंद्र का दोबारा शुरू होना नशा मुक्ति के प्रति प्रशासन की गंभीरता को दिखाता है। बेहतर इलाज, भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक माहौल के जरिए यह केंद्र मरीजों को नए और स्वस्थ जीवन की शुरुआत करने में मदद करेगा।