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First NDA Women Fighter Pilots: NDA के पहले बैच से देश को मिलीं दो महिला फाइटर पायलट, वायुसेना में उड़ाएंगी लड़ाकू विमान

Jun 13, 2026 5:38 PM

चरखी दादरी। जब हौसलों में उड़ान हो और देश सेवा का जज्बा रगों में दौड़ रहा हो, तो कोई भी मुकाम नामुमकिन नहीं रह जाता। हैदराबाद के डिंडीगुल एयरफोर्स एकेडमी में शनिवार का दिन भारतीय सैन्य इतिहास के लिए एक युगांतरकारी क्षण बन गया। एनडीए के पहले महिला बैच से ट्रेनिंग पूरी कर निकलीं दो बेटियों—इशिता सांगवान और मीनाक्षी ने कमीशन प्राप्त कर सीधे लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) के कॉकपिट में एंट्री मार ली है। साढ़े तीन साल के बेहद कड़े और रीढ़ की हड्डी सीधी कर देने वाले प्रशिक्षण के बाद अब ये दोनों विंग्स पहनकर देश की सीमाओं की रखवाली करेंगी। इनकी इस कामयाबी पर खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समारोह से पहले दोनों से मुलाकात की और कहा कि देश को अपनी इन बेटियों पर नाज है।

अदालती फैसले ने बदला इशिता का रास्ता, 12वीं के साथ ही क्रैक की परीक्षा

इशिता सांगवान के फाइटर पायलट बनने की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उनके पिता चरण सिंह सांगवान बताते हैं कि साल 2021 तक इशिता का लक्ष्य प्रशासनिक सेवा (UPSC) में जाने का था। वह दिल्ली में 12वीं की पढ़ाई के साथ इसकी तैयारी की रूपरेखा बना रही थीं। लेकिन तभी साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बेटियों के लिए एनडीए के दरवाजे खोल दिए। इस फैसले ने देश की हजारों बेटियों के साथ इशिता के सपने को भी एक नई दिशा दी। फैसले के महज एक महीने बाद ही उन्होंने एनडीए की लिखित परीक्षा पास की और 6 अगस्त 2022 को उनके घर जॉइनिंग लेटर आ गया। पुणे के खड़कवासला में तीन साल की बेसिक और हैदराबाद में छह महीने की एडवांस ट्रेनिंग के बाद आज इशिता आसमान की नई महारानी हैं।

सूबेदार मेजर की बेटी और कैप्टन की बहन मीनाक्षी ने परंपरा को दिया नया आसमान

वहीं दूसरी ओर, भागवी गांव की मीनाक्षी के खून में ही देश सेवा रची-बसी है। उनके पिता रविंद्र तक्षक सेना में सूबेदार मेजर हैं और बड़े भाई सचिन कुमार भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर सिक्किम में तैनात हैं। धौला कुआं स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल से 12वीं करने वाली मीनाक्षी ने बचपन से ही वर्दी की धमक को करीब से देखा था। लेकिन उन्होंने सेना की बजाय वायुसेना का रास्ता चुना। खड़कवासला में तीन साल की कड़ी शारीरिक और मानसिक ट्रेनिंग के बाद उन्हें एयरफोर्स विंग आवंटित हुई। इसके बाद हैदराबाद में उन्होंने छह महीने तक लड़ाकू विमान उड़ाने का वह विशेष और जोखिम भरा प्रशिक्षण लिया, जिसे पूरा करते ही उनके कंधों पर चमकते सितारे सज गए। उनकी मां मुकेश देवी कहती हैं कि बेटी ने आज परिवार की सैन्य परंपरा को एक नए आसमान पर पहुंचा दिया है।

गांवों में जश्न का माहौल, बेटियों ने कहा- "कुछ भी असंभव नहीं"

इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए दोनों बेटियों के परिवार हैदराबाद पहुंचे थे। इशिता के माता-पिता और भाई-बहन जहां भावुक नजर आए, वहीं मीनाक्षी के परिजनों की आंखें भी खुशी से नम थीं। इशिता पिछले साल जून 2025 में जब अपनी तीन साल की एनडीए ट्रेनिंग पूरी कर पैतृक गांव छपार पहुंची थीं, तो उन्होंने बाबा जमुना दास मंदिर में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया था। अब महज 22 वर्ष की उम्र में उनके कंधों पर देश की संप्रभुता की जिम्मेदारी है। उधर, मीनाक्षी के गांव भागवी में सरपंच प्रमिला कुमारी की अगुवाई में रविवार को एक बड़े नागरिक अभिनंदन समारोह की तैयारी की जा रही है।

अपनी इस अद्वितीय सफलता पर दोनों महिला फाइटर पायलटों ने देश की अन्य बेटियों के नाम एक बेहद कड़ा और प्रेरक संदेश दिया है। उन्होंने कहा, "जीवन में कभी भी अपने लक्ष्यों को छोटा मत रखिए। अगर आप पूरी शिद्दत, लगन और बिना थके मेहनत करने को तैयार हैं, तो इस दुनिया का कोई भी मुकाम या कोई भी सपना असंभव नहीं है। आज की सफलता की यह खुशी हमें जिंदगी भर गर्व का अहसास कराएगी।"

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