कॉकरोच जनता पार्टी का देशव्यापी एक्शन: भ्रष्ट अफसरों को बेनकाब करने के लिए जनता से मांगे पुख्ता सबूत
May 22, 2026 5:29 PM
दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र और राजनीति के इतिहास में अमूमन ऐसा कम ही देखा गया है जब बिना किसी पारंपरिक रैली या जमीनी कैडर के, कोई संगठन देश की सबसे बड़ी पार्टियों के लिए चुनौती बन जाए। देश की न्यायिक व्यवस्था और बेरोजगारी पर आई एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया के मंच से शुरू हुआ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का यह सफर अब पूरे भारत में एक बड़े वैचारिक आंदोलन का रूप ले चुका है। इस मंच के सूत्रधार अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि केवल डिजिटल विरोध दर्ज कराने का समय अब बीत चुका है; अब समय आ गया है देश की व्यवस्था को झकझोरने का। उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले देश के सजग नागरिकों और पत्रकारों से आह्वान किया है कि वे अपने-अपने राज्यों के भ्रष्ट सरकारी अमलों, रिश्वतखोर विभागों और उनसे जुड़े अधिकारियों की सूची पुख्ता वीडियो और कागजी सुबूतों के साथ साझा करें।
बीजेपी और कांग्रेस से आगे निकली फॉलोअर्स की रेस, युवाओं में भारी क्रेज
देश के युवा वर्ग के भीतर मौजूदा व्यवस्था को लेकर चल रही छटपटाहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्चुअल पार्टी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या 1.90 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह आंकड़ा भारत के सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कुल ऑनलाइन ताकत (लगभग 1 करोड़) को भी बहुत पीछे छोड़ चुका है। हालांकि, देश की सीमाओं के भीतर इस प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर इसके आधिकारिक हैंडल को भारत सरकार के आदेश पर प्रतिबंधित (जियो-ब्लॉक) कर दिया गया है। इसके बावजूद, तकनीक के इस दौर में वीपीएन और विदेशी सर्वरों के माध्यम से भारतीय युवाओं के बीच इसका जुड़ाव लगातार गहराता जा रहा है।
ध्रुवीकरण की राजनीति के बजाय बुनियादी मुद्दों पर देशव्यापी बहस
इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय राजनीति के उस ढर्रे को बदलना है जो दशकों से धार्मिक और सामाजिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। सीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि देश के चुनावी विमर्श की दिशा अब वास्तविक और कंक्रीट मुद्दों की तरफ मुड़नी चाहिए, जिसमें युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, देश के घरेलू उद्योगों का विकास और स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) जैसे विषय शामिल हों। इसके साथ ही, भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं जैसे चुनाव आयोग, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और न्यायपालिका की स्वतंत्रता व उनकी जनता के प्रति जवाबदेही तय करना इस आंदोलन का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ है।
5 सूत्रीय कड़ा एजेंडा: राजनीतिक पालाबदलू और कॉरपोरेट मीडिया पर सीधा वार
पार्टी की ओर से जारी किए गए पांच सूत्रीय राष्ट्रीय घोषणापत्र ने देश के नीति-नियंताओं और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस घोषणापत्र की पहली और प्रमुख मांग है कि देश के किसी भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) को उनके सेवानिवृत्त (रिटायरमेंट) होने के बाद किसी भी तरह के सरकारी लाभ के पद या राज्यसभा की सीट का 'पुरस्कार' न दिया जाए। इसके अलावा, मतदाताओं के नाम सूची से गायब करने या हेरफेर करने वाले चुनाव आयुक्तों पर सीधे यूएपीए (UAPA) के तहत देशद्रोह का मुकदमा चलाने, संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को सीधे 50 प्रतिशत आरक्षण देने और दल-बदल करने वाले नेताओं पर 20 साल तक चुनाव लड़ने का प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसके साथ ही, देश के बड़े औद्योगिक घरानों के मालिकाना हक वाले और उनकी कठपुतली बने मीडिया संस्थानों के लाइसेंस तुरंत रद्द करने जैसी बेहद तीखी और क्रांतिकारी मांगें इस घोषणापत्र का हिस्सा हैं।