दिल्ली में 'लखपति बिटिया योजना' शुरू, बेटी के जन्म से ग्रेजुएशन तक सरकार देगी लाखों की मदद
Apr 04, 2026 3:26 PM
दिल्ली। देश की राजधानी में अब बेटियों की पढ़ाई और उनके सुनहरे भविष्य की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार ने अपने कंधों पर ले ली है। मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से 'लखपति बिटिया योजना' को जमीन पर उतार दिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जरिए संचालित होने वाली यह योजना पुरानी 'लाडली स्कीम' का स्थान लेगी, जिसे अब नए स्वरूप और बढ़ी हुई वित्तीय सहायता के साथ पेश किया गया है। सरकार का सीधा लक्ष्य उन परिवारों की मदद करना है जो तंगहाली के कारण अपनी बेटियों को बीच में ही स्कूल से उठा लेते हैं। इस योजना के जरिए अब दिल्ली की हर जरूरतमंद बेटी के हाथ में उच्च शिक्षा के लिए एक बड़ी मुश्त रकम होगी।
जन्म से लेकर डिग्री तक: जानिए कब और कितनी मिलेगी आर्थिक मदद
इस योजना का खाका कुछ इस तरह तैयार किया गया है कि बेटी की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसकी शिक्षा का खर्च भी सरकार उठाती रहे। योजना के तहत जैसे ही बेटी का जन्म होगा, सरकार उसके नाम पर 11 हजार रुपये जमा करेगी। इसके बाद स्कूली सफर शुरू होने पर पहली, छठी, नौवीं और बारहवीं कक्षा में दाखिला लेने पर 5-5 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। तकनीकी शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। 1 साल के डिप्लोमा के लिए 10 हजार, 2-3 साल के डिप्लोमा के लिए 20 हजार और 4 साल के ग्रेजुएशन कोर्स के लिए 25 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि दी जाएगी। यह पूरी रकम समय के साथ ब्याज जुड़कर मैच्योरिटी के वक्त लगभग 1.20 लाख रुपये बन जाएगी।
किसे मिलेगा लाभ और क्या हैं शर्तें?
दिल्ली सरकार ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी मानक तय किए हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि बेटी का जन्म दिल्ली में हुआ हो या उसके परिजन पिछले 3 साल से दिल्ली के स्थायी निवासी हों। सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए आय सीमा का भी विशेष ख्याल रखा गया है; केवल वही परिवार इस योजना के पात्र होंगे जिनकी कुल वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से अधिक नहीं है। सरकार को उम्मीद है कि इस वित्तीय सुरक्षा चक्र से राजधानी में 'स्कूल ड्रॉप-आउट' रेट में बड़ी गिरावट आएगी और बेटियां आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
उच्च शिक्षा के लिए 18 या 21 साल पर मिलेगी बड़ी राशि
योजना की सबसे खास बात यह है कि यह पैसा सीधे तौर पर खर्च नहीं किया जा सकेगा, बल्कि यह एक निवेश की तरह काम करेगा। जब बेटी 18 या 21 वर्ष की आयु पूरी कर लेगी, तब यह संचित राशि ब्याज सहित उसे सौंपी जाएगी। यह वह समय होता है जब प्रोफेशनल कोर्स या उच्च शिक्षा के लिए मोटी फीस की जरूरत पड़ती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली सरकार का यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति नजरिया बदलने में भी मील का पत्थर साबित होगा।