18 बिजली मीटरों में ब्लास्ट के बाद मची चीख-पुकार; विजय विहार में 4 मंजिला मकान से ऐसे हुआ चमत्कारी रेस्क्यू
May 26, 2026 5:16 PM
नई दिल्ली। दिल्ली का रोहिणी इलाका मंगलवार की सुबह एक बड़े हादसे का गवाह बनते-बनते रह गया। विजय विहार फेज-2 की एक तंग गली में स्थित चार मंजिला इमारत में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब भूतल (ग्राउंड फ्लोर) से उठी आग की लपटों ने पूरी बिल्डिंग को अपने घेरे में ले लिया। गनीमत यह रही कि दमकल विभाग और स्थानीय लोगों की मुस्तैदी से समय रहते एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिससे एक ही झटके में 23 जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर खींच लिया गया।
आधी अधूरी नींद में थे लोग; जब सीढ़ियों पर फैल गया काला धुआं
फायर कंट्रोल रूम के मुताबिक, उन्हें सुबह ठीक 7:06 बजे विजय विहार की इस इमारत में आग लगने की आपातकालीन कॉल मिली थी। चूंकि सुबह का वक्त था, इसलिए अधिकांश निवासी अपनी नींद में थे या जागने की तैयारी कर रहे थे। अचानक नीचे से आई तेज आवाज और कमरों में भरते काले धुएं ने लोगों को संभलने का मौका नहीं दिया।
आग ग्राउंड फ्लोर पर लगे टाटा पावर (TPDDL) के 18 बिजली मीटरों में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी। मीटरों में भड़के इस स्पार्क ने पास ही खड़ी गाड़ियों को भी अपनी जद में ले लिया, जिससे आग कुछ ही मिनटों में सीढ़ियों के रास्ते ऊपर की ओर बढ़ने लगी।
दमकलकर्मियों की जांबाजी; वाहनों के रूप में बदला कबाड़
संकट की गंभीरता को देखते हुए स्टेशन ऑफिसर विशाल के नेतृत्व में तुरंत दो वॉटर टेंडर और एक स्पेशल ब्रीदिंग फायर टेंडर (BFT) को संकरी गलियों के रास्ते मौके पर उतारा गया। कंक्रीट के इस जाल में धुआं इतनी तेजी से भरा था कि लोगों का दम घुटने लगा था। दमकलकर्मियों ने ऑक्सीजन मास्क पहनकर इमारत में प्रवेश किया और ऊपरी मंजिलों की बालकनी और खिड़कियों से रास्ता बनाकर एक-एक कर 22 लोगों को सुरक्षित नीचे उतारा। इनसे पहले ही, पड़ोसियों ने हौसला दिखाते हुए एक शख्स को पहली मंजिल से सुरक्षित निकाल लिया था।
इस हादसे में दो लोग धुएं और लपटों के कारण झुलस गए, जिन्हें आनन-फानन में रोहिणी के ही जयपुर गोल्डन अस्पताल ले जाया गया, जहां फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। हालांकि, ग्राउंड फ्लोर पर खड़ी गाड़ियों की किस्मत अच्छी नहीं थी; आग की प्रचंडता के कारण 3 स्कूटी, 2 मोटरसाइकिल और एक साइकिल जलकर लोहे के ढांचे में तब्दील हो गई।
स्थानीय निवासियों का कहना है: "इमारत के मुहाने पर इतने सारे बिजली के मीटर लगाना हमेशा से एक बड़ा खतरा था। आज सुबह जब धमाका हुआ, तो ऐसा लगा जैसे कोई बम फटा हो। अगर दमकल की गाड़ियां पांच मिनट और लेट होतीं, तो धुएं के कारण ऊपर फंसे बच्चों और महिलाओं का बचना नामुमकिन हो जाता।"
फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में लापरवाही और शॉर्ट सर्किट के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए केस दर्ज कर लिया है। विद्युत कंपनी के अधिकारी भी मौके पर जांच के लिए पहुंचे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली की रिहाइशी इमारतों में सुरक्षा मानकों और बिजली के तारों के मकड़जाल की ओर प्रशासन का ध्यान खींचा है।