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पिंजौर खैर तस्करी कांड में बड़ी कार्रवाई: वन दरोगा अजीत सिंह सस्पेंड, 'माई सिटी' की खबर पर लगी मुहर

May 26, 2026 4:01 PM

पंचकुला। हरियाणा के सबसे संवेदनशील और हरे-भरे मोरनी-पिंजौर संभाग के सरकारी जंगलों में सक्रिय लकड़ी तस्करों और वन विभाग के कुछ कारिंदों की कथित सांठगांठ पर आखिरकार विभागीय हंटर चल गया है। वन विभाग ने भवाना बीट के अंतर्गत आने वाले जैथल गांव के जंगलों में हुए भारी वन कटान के मामले में बड़ी गाज गिराई है। इलाके की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार वन दरोगा अजीत सिंह को उनके पद से सस्पेंड कर दिया गया है। उन पर न सिर्फ तस्करों के आगे बेबस रहने बल्कि संकट के समय सीनियर अधिकारियों के आदेशों की नाफरमानी करने का भी दोष सिद्ध हुआ है।

आधी रात को कटते रहे खैर के पेड़; मौके से नदारद रहे जिम्मेदार

इस पूरे घपले की कड़ियां बीती 17 मई 2026 से जुड़ती हैं। भवाना बीट के जैथल गांव के पास स्थित सरकारी वन क्षेत्र में कुल्हाड़ियों और आरा मशीनों की गूंज सुनाई दी थी, जहां खैर के कीमती पेड़ों को काटकर उनकी छिलाई की जा रही थी। जब इस अवैध कटान की भनक पिंजौर के वन राजिक अधिकारी (RO) को लगी, तो वे दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। वहां का मंजर देखकर खुद अधिकारी भी सन्न रह गए; तस्करों ने बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान पहुंचाया था।

इस मामले की अंदरूनी जांच रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जब जंगलों में कटाई चल रही थी, तब वन दरोगा अजीत सिंह को वायरलेस और फोन के जरिए तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालने के कड़े निर्देश दिए गए थे। लेकिन, दरोगा ने मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाई। नतीजा यह हुआ कि तस्कर बिना किसी खौफ के कीमती लकड़ियां समेटकर फरार होने में कामयाब रहे।

मीडिया की सतर्कता रंग लाई; मुख्यालय छोड़ने का भी आरोप

शुरुआती तौर पर इस मामले को दबाने की पुरजोर कोशिश की गई थी, लेकिन 19 मई को 'माई सिटी' अखबार ने इस पूरी तस्करगाथा और वन विभाग की सुस्ती को प्रमुखता से उजागर कर दिया। खबर छपते ही चंडीगढ़ के गलियारों में हड़कंप मच गया और हरियाणा के मुख्य वन संरक्षक के. सी. मीना ने बिना वक्त गंवाए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया।

उत्तरी परिमंडल (अंबाला) के वन संरक्षक जितेंद्र अहलावत का रुख: "विभाग में किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में यह साफ हो गया है कि दरोगा अजीत सिंह ने न केवल अपनी ड्यूटी में कोताही बरती, बल्कि वे बिना अनुमति के अपने निर्धारित मुख्यालय से भी गायब थे। इसी लापरवाही के कारण यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।"

फिलहाल, दरोगा अजीत सिंह को मोरनी-पिंजौर से हटाकर कुरुक्षेत्र अटैच कर दिया गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है; इस कटान के पीछे छिपे सफेदपोशों और बड़े तस्करों के नेटवर्क को खंगालने के लिए पुलिस विभाग की भी मदद ली जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद से वन माफिया और महकमे के भीतर सुस्त पड़े अन्य कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल है।

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