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वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए बड़ी खुशखबरी: अब ट्रेन में मिलेगा आजीवन मुफ्त सफर का तोहफा

Mar 27, 2026 12:22 PM

दिल्ली। देश की सरहदों की हिफाजत में अपना सर्वस्व झोंक देने वाले शूरवीरों के लिए यह नवरात्रि खुशियों की नई सौगात लेकर आई है। केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए घोषणा की है कि भारतीय सेना के वीरता पुरस्कार विजेताओं को अब ताउम्र ट्रेनों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। यह केवल एक रियायत नहीं, बल्कि उन पदकों की गरिमा का सम्मान है जो इन जवानों ने गोलियों की गड़गड़ाहट और बर्फीली चोटियों पर तिरंगे की शान बढ़ाते हुए हासिल किए हैं।

फर्स्ट क्लास और 2AC में सफर, साथ में एक हमसफर भी

रेल मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह सुविधा थल सेना, वायु सेना और नौसेना के उन सभी जांबाजों को मिलेगी जिन्होंने वीरता पदक (जैसे परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र, अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र) जीते हैं। खास बात यह है कि ये योद्धा न केवल फर्स्ट क्लास, 2AC और AC चेयर कार जैसी प्रीमियम श्रेणियों में मुफ्त सफर कर सकेंगे, बल्कि अपने साथ एक सहयोगी या साथी को भी ले जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि उम्र के इस पड़ाव पर या यात्रा के दौरान इन नायकों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए।

वीर नारियों और वीर माताओं का भी रखा ख्याल

मोदी सरकार की इस पहल की सबसे मानवीय कड़ी इसका विस्तार है। यह योजना सिर्फ जीवित सैनिकों तक सीमित नहीं है। मरणोपरांत वीरता पुरस्कार पाने वाले शहीदों के माता-पिता को भी इस आजीवन मुफ्त यात्रा का लाभ दिया गया है। इसके अलावा, शहीद सैनिकों की पत्नियां (वीर नारियां) और विधुर पति भी इस सम्मानजनक सुविधा के हकदार होंगे, चाहे उन्होंने पुनर्विवाह ही क्यों न कर लिया हो। यह कदम उन परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और संबल देने की कोशिश है जिन्होंने देश के लिए अपना लाल या सुहाग खोया है।

युवाओं के लिए प्रेरणा और सेना का मनोबल

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों का असर सीधा सेना के मनोबल पर पड़ता है। जब एक जवान सरहद पर खड़ा होता है, तो उसे यह अहसास होना चाहिए कि उसका देश और उसकी सरकार उसके परिवार और उसके सम्मान के लिए सदैव खड़ी है। गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय के इस साझा प्रयास को भविष्य में युवाओं को सेना की ओर आकर्षित करने वाले एक बड़े कारक के रूप में देखा जा रहा है। यह घोषणा महज एक 'फ्री पास' नहीं, बल्कि उन वीरगाथाओं को हर घर तक पहुंचाने का एक जरिया है जो गुमनामी के अंधेरे में कहीं खो न जाएं।

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