हाईवे पर रफ्तार को नहीं लगेगा ब्रेक! देश का पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू, जानें कैसे कटेगा पैसा
May 02, 2026 4:40 PM
नई दिल्ली। नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक नए युग की शुरुआत हो गई है। वह वक्त अब करीब है जब टोल प्लाजा पर लंबी कतारें, गाड़ियों का शोर और बैरियर खुलने का इंतज़ार महज इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 मई 2026 को गुजरात के सूरत-भरूच हाईवे (NH-48) पर देश के पहले 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) टोलिंग सिस्टम का उद्घाटन कर दिया है।
इस तकनीक के धरातल पर उतरने के साथ ही अब हाईवे पर 'जीरो वेटिंग टाइम' का सपना हकीकत में बदलता दिख रहा है।
कैसे काम करेगा यह 'बैरियर-लेस' जादू?
सूरत के पास स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर शुरू हुआ यह सिस्टम पूरी तरह से अत्याधुनिक सेंसर और एआई कैमरों पर आधारित है। अब तक हम जिस फास्टैग (FASTag) सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे थे, उसमें गाड़ी को एक निश्चित बिंदु पर धीमा करना पड़ता था ताकि सेंसर टैग को रीड कर सके और बैरियर खुल सके।
लेकिन इस नई तकनीक में हाईवे के ऊपर एक 'ओवरहेड फ्रेम' लगाया गया है, जो हाई-स्पीड कैमरों और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से लैस है। जैसे ही आपकी गाड़ी 80 या 100 की रफ्तार से इस फ्रेम के नीचे से गुजरेगी, सिस्टम आपकी गाड़ी की पहचान कर लेगा और खाते से अपने-आप टोल कट जाएगा। यानी, न कोई फिजिकल बैरियर होगा और न ही गाड़ी की रफ्तार रोकने की मजबूरी।
समय, ईंधन और पर्यावरण: तीनतरफा फायदा
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, इस सिस्टम के बड़े पैमाने पर लागू होने से देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को नई गति मिलेगी।
सफर होगा सुपरफास्ट: टोल पर रुकने का झंझट खत्म होने से यात्रा के समय में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आएगी।
ईंधन की भारी बचत: बार-बार गाड़ी को रोकने और गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे डीजल-पेट्रोल की खपत कम होगी।
प्रदूषण पर लगाम: जब टोल पर गाड़ियां कतार में खड़ी होकर धुआं नहीं छोड़ेंगी, तो हाईवे के आसपास का प्रदूषण स्तर भी काफी हद तक नीचे आएगा।
पूरे देश में लागू करने का मेगा प्लान
नितिन गडकरी अक्सर भारतीय सड़कों को अमेरिका और यूरोप के मानकों के बराबर ले जाने की बात करते हैं, और यह कदम उसी दिशा में सबसे बड़ी छलांग है। गडकरी ने उद्घाटन के दौरान संकेत दिया कि सरकार का लक्ष्य इस तकनीक को पूरे देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर विस्तार देना है। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर 2026 तक भारत के अधिकांश प्रमुख हाईवे 'बैरियर-फ्री' हो जाएंगे।
इस सिस्टम की सफलता के बाद, अब सरकार सैटेलाइट आधारित (GPS) टोलिंग पर भी विचार कर रही है, जिससे टोल प्लाजा की संरचना ही पूरी तरह खत्म हो सकती है। फिलहाल, गुजरात का यह सफल प्रयोग भविष्य के 'स्मार्ट हाईवे' की पहली झलक पेश कर रहा है।