रेलवे का नया फरमान: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे टिकट कैंसिल करने के नियम, जेब पर पड़ेगा बड़ा बोझ
Mar 25, 2026 4:59 PM
दिल्ली। अगर आप भी इस उम्मीद में टिकट बुक करा लेते हैं कि 'नहीं गए तो कैंसिल करा लेंगे', तो सावधान हो जाइए। रेल मंत्रालय ने अपनी कैंसिलेशन नीति को बेहद सख्त कर दिया है। 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई गाइडलाइंस के मुताबिक, रिफंड की राशि अब पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि आप ट्रेन रवाना होने से कितने घंटे पहले अपना इरादा बदलते हैं। जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां ट्रेन के समय के करीब पहुँचेंगी, आपके रिफंड की राशि उतनी ही तेजी से घटती जाएगी।
8 घंटे की 'डेडलाइन': आखिरी वक्त पर कैंसिलेशन का खेल खत्म
नए नियमों में सबसे चौंकाने वाला बदलाव 8 घंटे की समय-सीमा को लेकर है। पहले यात्री ट्रेन छूटने से 4 घंटे पहले तक टिकट रद्द कराकर कुछ रिफंड पा लेते थे, लेकिन अब रेलवे ने इस विंडो को बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया है। यानी अगर आपकी ट्रेन छूटने में 8 घंटे से कम का समय बचा है और आप टिकट कैंसिल करते हैं, तो आपको एक रुपया भी वापस नहीं मिलेगा। रेलवे का मानना है कि इससे उन 'होल्डर्स' पर लगाम लगेगी जो आखिरी वक्त तक सीटें दबाकर रखते हैं और बाद में उन्हें छोड़ देते हैं, जिससे जरूरतमंद यात्रियों को परेशानी होती है।
जुर्माने की नई दरें: कब, कितना कटेगा पैसा?
कैंसिलेशन का समय (ट्रेन रवाना होने से पहले)कटौती 72 घंटे से अधिक पहलेकेवल न्यूनतम फ्लैट चार्जअधिकतम रिफंड मिलेगा , 72 घंटे से 24 घंटे के बीच25% किराया + न्यूनतम शुल्करिफंड में बड़ी कटौती, 24 घंटे से 8 घंटे के बीचसीधा 50% किरायाआधा पैसा डूबेगा, 8 घंटे से कम समय शून्य रिफंडकोई पैसा वापस नहीं मिलेगा।
1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक 'ट्रायल मोड'
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों को एक झटके में थोपने के बजाय 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच चरणबद्ध तरीके से (Phase-wise) लागू किया जाएगा। इस दौरान सॉफ्टवेयर अपडेट और यात्रियों को जागरूक करने का काम किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि टिकटों की कालाबाजारी करने वाले अक्सर फर्जी नाम से टिकट बुक कर लेते हैं और आखिरी समय में उन्हें कैंसिल करते हैं, नई नीति से ऐसे गिरोहों की कमर टूटेगी और वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों के कंफर्म होने की संभावना बढ़ जाएगी।