अवैध जुआ, सट्टेबाजी पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, 300 वेबसाइट और ऐप ब्लॉक
Mar 20, 2026 5:00 PM
नई दिल्ली: भारत सरकार ने अवैध जुआ और सट्टेबाजी के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 300 वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशन को ब्लॉक कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई ऑनलाइन स्पोर्ट्स सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन कैसीनो और बेटिंग एक्सचेंज जैसे नेटवर्क पर की गई है, जो लंबे समय से नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। सरकार का यह कदम डिजिटल स्पेस में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर कड़ी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, जिन वेबसाइट और ऐप को ब्लॉक किया गया है, वे मुख्य रूप से ऑनलाइन स्पोर्ट्स बेटिंग और सट्टा बाजार से जुड़े थे। ये प्लेटफॉर्म यूजर्स को बिना किसी वैध अनुमति के सट्टेबाजी की सुविधा देते थे। इसके अलावा, कई वेबसाइट ‘बेटिंग एक्सचेंज’ के रूप में काम कर रही थीं, जहां लोग सीधे एक-दूसरे के साथ दांव लगाते थे।
मटका नेटवर्क और कैसीनो ऐप भी निशाने पर
सरकार की इस कार्रवाई में पारंपरिक सट्टा/मटका नेटवर्क से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं। साथ ही ‘रियल-मनी’ कार्ड गेम और ऑनलाइन कैसीनो ऐप्स पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इन ऐप्स के जरिए बड़ी संख्या में लोग पैसे लगाकर गेम खेलते थे, जिससे अवैध लेनदेन और वित्तीय जोखिम बढ़ रहे थे।
अब तक 8,400 से ज्यादा वेबसाइट ब्लॉक
सूत्रों ने बताया कि यह कार्रवाई एक बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत अब तक लगभग 8,400 वेबसाइट और ऐप को ब्लॉक किया जा चुका है। इनमें से करीब 4,900 प्लेटफॉर्म ‘ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम’ लागू होने के बाद बंद किए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे पर लगातार सख्ती बरत रही है।
डिजिटल सुरक्षा और यूजर्स की सुरक्षा पर जोर
सरकार का मानना है कि अवैध सट्टेबाजी और जुआ प्लेटफॉर्म न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी जैसे जोखिम भी बढ़ाते हैं। ऐसे में इन वेबसाइट और ऐप को ब्लॉक करना डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
सूत्रों के अनुसार, सरकार भविष्य में भी ऐसे अवैध प्लेटफॉर्म की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की प्रक्रिया जारी रखेगी। इसके साथ ही यूजर्स को भी सतर्क रहने और केवल वैध प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करने की सलाह दी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार के आर्थिक या साइबर जोखिम से बचा जा सके।