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Amalaki Ekadashi 2026: आज है आमलकी एकादशी, 1000 गायों के दान के बराबर पुण्य पाने के लिए करें ये उपाय

Feb 27, 2026 12:00 PM

Amalaki Ekadashi 2026: दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश के मंदिरों में आज आमलकी एकादशी की भारी धूम देखने को मिल रही है। फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस महत्वपूर्ण एकादशी को आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन सनातन धर्म को मानने वाले लाखों श्रद्धालु भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस पावन अवसर पर आंवले के पेड़ की पूजा करने से आम इंसान के जीवन से आर्थिक संकट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं।

हजार गायों के दान के बराबर मिलता है पुण्य

हिंदू शास्त्रों में एकादशी तिथि को बहुत पवित्र माना गया है। आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष और फल की पूजा करना सबसे अहम है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, आज के दिन जो भक्त सच्चे मन से भगवान विष्णु और आंवले की पूजा करता है, उसे एक हजार गायों के दान के बराबर महापुण्य मिलता है। यह व्रत इंसान को पापों से मुक्ति दिलाकर मानसिक शांति और घर में सुख-समृद्धि लाता है।

दूर होंगे कुंडली के दोष, करें ये अचूक उपाय

अगर आपके काम लगातार बिगड़ रहे हैं या पैसों की किल्लत बनी हुई है, तो आज आंवले के पेड़ से जुड़ा एक खास उपाय आपको जरूर करना चाहिए। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए आंवले के पेड़ के पास जाएं। एक लोटे में शुद्ध जल, थोड़ा सा कच्चा दूध और रोली मिलाकर उसे सीधे पेड़ की जड़ में अर्पित करें।

जल चढ़ाने के ठीक बाद आंवले के पेड़ की 21 या 108 बार परिक्रमा करें। इस उपाय को करने से इंसान की कुंडली में मौजूद सभी भारी दोष समाप्त हो जाते हैं। सालों से अटके हुए काम तेजी से पूरे होने लगते हैं और परिवार में धन का आगमन सुनिश्चित होता है।

स्वर्ण दान के समान है आंवले का दान

आमलकी एकादशी के दिन दान-पुण्य का भी बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। आज के दिन किसी ब्राह्मण या गरीब-जरूरतमंद व्यक्ति को आंवले का फल या उसका पौधा दान में देना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों में एकादशी के दिन आंवले के दान को सोने (स्वर्ण) के दान के बराबर माना गया है। इससे इंसान को जीवन में कभी भी पैसों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ता और दरिद्रता दूर होती है।

ब्रह्मा जी के साथ हुई थी आंवले की उत्पत्ति

आंवले के पेड़ को इतना पवित्र क्यों माना जाता है, इसके पीछे एक बड़ी पौराणिक कथा मौजूद है। मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया था, ठीक उसी समय आंवले के वृक्ष की भी उत्पत्ति हुई थी। यही वजह है कि भगवान विष्णु को आंवला सबसे ज्यादा प्रिय है और इस एकादशी पर इसकी पूजा को अनिवार्य माना गया है।

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