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मां दुर्गा की कृपा चाहिए? तो कन्या पूजन में दिशाओं का रखें विशेष ध्यान, जानें विशेषज्ञों की राय

Mar 26, 2026 11:55 AM

धर्म। चैत्र नवरात्रि की धूम चारों ओर है और भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना में लीन हैं। व्रत और उपवास के बाद सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव आता है 'कन्या पूजन' का। मान्यता है कि बिना कन्या पूजन के नौ दिनों की भक्ति पूर्ण नहीं होती। लेकिन अक्सर श्रद्धा के अतिरेक में भक्त वास्तु के उन नियमों को भूल जाते हैं, जो पूजा के फल को कई गुना बढ़ा सकते हैं। ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञों की मानें तो कन्याओं को भोजन कराते समय आपकी दिशा और स्थान का चुनाव ही तय करता है कि मां की कृपा आप पर कितनी बरसेगी।

अग्नि कोण में ही क्यों बिठाएं कन्याएं?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा जिसे 'अग्नि कोण' कहा जाता है, कन्या पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इसके पीछे एक गहरा तर्क है। मां दुर्गा अदम्य साहस, ऊर्जा और शक्ति का स्रोत हैं, जिन्हें अग्नि तत्व से जोड़कर देखा जाता है। अग्नि कोण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे तीव्र होता है। जब आप इस दिशा में कन्याओं को बिठाकर उनका पद-प्रक्षालन (पैर धोना) और पूजन करते हैं, तो घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।

ईशान कोण और दक्षिण दिशा से परहेज जरूरी

ज्यादातर लोग घर के मंदिर वाले स्थान यानी उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में ही कन्या पूजन कर लेते हैं, जो वास्तु सम्मत नहीं है। ईशान कोण का संबंध जल तत्व से है, जो अग्नि तत्व (मां दुर्गा की ऊर्जा) के विपरीत माना जाता है। वहीं, दक्षिण और पश्चिम दिशा को पितरों या तामसिक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इन दिशाओं में कन्याओं का मुख करके भोजन कराना आपकी पूजा को निष्फल कर सकता है। अनजाने में की गई ये छोटी सी चूक आपको वांछित फल से वंचित रख सकती है।

इन बातों का भी रखें विशेष ख्याल

दिशा के साथ-साथ कन्याओं की आयु और संख्या का भी अपना महत्व है। 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को मां के विभिन्न स्वरूपों (जैसे कुमारिका, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहिणी) के रूप में पूजा जाता है। पूजन के समय कन्याओं का स्वागत पूरे आदर के साथ करें और विदाई के समय उन्हें सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें। यदि आप वास्तु के इन सटीक नियमों का पालन करते हुए अष्टमी या नवमी को पूजन करते हैं, तो निश्चित ही आपके घर की नकारात्मकता दूर होगी और मां का आशीर्वाद बरसेगा।

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