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Faridabad BPL Plot Registry: फरीदाबाद में अंत्योदय: 100-100 गज के प्लॉट की रजिस्ट्री पाकर भावुक हुए बीपीएल परिवार

Jun 14, 2026 6:08 PM

फरीदाबाद। कहते हैं कि न्याय में देरी असल में न्याय न मिलने के बराबर होती है, लेकिन जब पांच दशकों के संघर्ष के बाद हक हाथ में आए, तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता। ऐसा ही कुछ नजारा फरीदाबाद के सेक्टर-28 में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के कार्यालय पर देखने को मिला। फतेहपुर बिलोच गांव के बेहद गरीब और जरूरतमंद 148 बीपीएल परिवारों को आखिरकार उनके 100-100 गज के रिहायशी प्लॉट की रजिस्ट्री के आधिकारिक कागज सौंप दिए गए। यह केवल कुछ पन्नों के दस्तावेज नहीं थे, बल्कि इन परिवारों के लिए अपनी माटी पर अपना आशियाना खड़ा करने के उस सपने की चाबी थी, जिसे देखते-देखते उनकी दो पीढ़ियां गुजर गईं।

"प्लॉट तो थे, पर गांव के दबंग नहीं लेने दे रहे थे कब्जा"

रजिस्ट्री के कागज सीने से लगाए बुजुर्ग लाभार्थियों ने भावुक होते हुए व्यवस्था के उस स्याह चेहरे को भी बेनकाब किया जिससे वे पिछले 49 सालों से जूझ रहे थे। उन्होंने बताया, "हुजूर, प्लॉट तो हमें कागजों में सालों पहले अलॉट हो गए थे, लेकिन जमीन का दीदार आज तक नसीब नहीं हुआ। गांव के कुछ दबंग और रसूखदार लोग हमें उस जमीन पर पैर भी नहीं रखने देते थे। आज 49 साल बाद मोदी-सैनी सरकार की बदौलत हमें कानूनी मालिकाना हक मिला है। अब प्रशासन से बस इतनी गुहार है कि हमें जमीन का वास्तविक कब्जा भी दिलवा दिया जाए, ताकि हम अपनी झोपड़ी डालकर चैन से सो सकें।"

इस मानवीय पहलू पर बोलते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि यह सरकार किसी भी गरीब का हक मरने नहीं देगी। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सशक्त बनाना है। आज 148 परिवारों को यह सौगात देकर सरकार ने साबित किया है कि हम केवल वादे नहीं करते, जमीन पर काम करते हैं। इन परिवारों को अपना घर बनाने के लिए हर संभव प्रशासनिक मदद दी जाएगी।"

कॉलोनियों को तोड़ने की बातें सिर्फ सियासी स्टंट और अफवाह: गुर्जर

इस वितरण समारोह के इतर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए केंद्रीय मंत्री ने शहर के कई सुलगते राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया:

वोटर लिस्ट (SIR) पर सफाई: चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) की प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से एक संवैधानिक और नियमित प्रक्रिया है। इसका एकमात्र मकसद वोटर लिस्ट को पारदर्शी और अपडेट रखना है। जो लोग दुनिया छोड़ चुके हैं या पलायन कर गए हैं, उनके नाम नियमानुसार हटाए जा रहे हैं और युवाओं के नाम जोड़े जा रहे हैं।

तोड़फोड़ की अफवाहों पर पूर्णविराम: शहर की अवैध कॉलोनियों में कथित बुलडोजर कार्रवाई और तोड़फोड़ के डर पर उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "कॉलोनियों को उजाड़ने की बातें सरासर झूठ और अफवाह हैं। हमारी सरकार ने पिछले सालों में रिकॉर्ड संख्या में कॉलोनियों को वैध (नियमित) किया है। हां, अगर किसी बड़े जनहित प्रोजेक्ट, सड़क या अस्पताल के रास्ते में कोई अवैध अतिक्रमण आता है, तो जनहित में उसे हटाना कानूनी मजबूरी होती है।"

मंत्रिमंडल विस्तार पर संक्षिप्त जवाब: जब पत्रकारों ने उनसे प्रदेश में होने वाले संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर सवाल दागा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए अनुभवी राजनेता की तरह गेंद शीर्ष नेतृत्व के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार (Prerogative) है, इस पर समय आने पर वही फैसला लेंगे।

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