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Fact Check: क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल की गंध से गाड़ियों पर मंडरा रही हैं मधुमक्खियां? जानिए इस वायरल वीडियो का सच

Jun 14, 2026 5:10 PM

जब से सरकार ने पर्यावरण को बचाने और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने (E20 Fuel) की नीति को रफ्तार दी है, तब से ही इंटरनेट पर इसे लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है। इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, फेसबुक और व्हाट्सएप पर एक वीडियो यूजर्स के बीच कौतूहल और डर का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में एक पेट्रोल पंप का नजारा है, जहां मोटरसाइकिल में ईंधन डलवाते समय उसकी टंकी के चारों तरफ दर्जनों मधुमक्खियां भिनभिनाती और बैठती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा जा रहा है कि एथेनॉल में गन्ने का अंश होने के कारण मधुमक्खियां अब पेट्रोल को शक्कर का घोल समझकर उस पर टूट पड़ी हैं। लेकिन क्या इस बात में कोई वैज्ञानिक सच्चाई है? जब इस वीडियो की पड़ताल की गई, तो कहानी कुछ और ही निकली।

पहली नजर में ही खुल गई पोल, वीडियो पर लगा है Gemini AI का ठप्पा

तथाकथित तौर पर सच दिखने वाले इस वीडियो को जब ध्यान से देखा गया, तो इसमें कई तकनीकी खामियां नजर आईं। वीडियो के निचले हिस्से में बाईं तरफ (Bottom Left) साफ तौर पर गूगल के एआई टूल 'Gemini' का वॉटरमार्क या लोगो दिखाई देता है।

डिजिटल फॉरेंसिक और फैक्ट-चेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस भ्रामक क्लिप को तैयार करने के लिए पहले जेमिनी एआई की मदद से एक अत्यधिक रियलिस्टिक (यथार्थवादी) तस्वीर तैयार की गई। इसके बाद, उस स्थिर तस्वीर को किसी अन्य 'टेक्स्ट-टू-वीडियो' एआई सॉफ्टवेयर में डालकर एक चलते-फिरते वीडियो का रूप दे दिया गया। आज के दौर में एआई टूल्स के जरिए ऐसी भ्रामक क्लिप बनाना बेहद आसान हो चुका है, जिसका इस्तेमाल लोग केवल व्यूज बटोरने या किसी नीति को बदनाम करने के लिए कर रहे हैं।

क्या वाकई एथेनॉल से खिंची चली आती हैं मधुमक्खियां? समझिए विज्ञान

अगर इस एआई वीडियो को किनारे रखकर विशुद्ध विज्ञान की बात करें, तो भी वायरल दावा पूरी तरह खोखला साबित होता है। वनस्पति वैज्ञानिकों और कीट विशेषज्ञों की विभिन्न रिसर्च रिपोर्ट्स स्पष्ट करती हैं कि एथेनॉल भले ही गन्ने या मक्के के फर्मेंटेशन (किण्वन) से बनता हो, लेकिन अंतिम प्रक्रिया के बाद यह एक विशुद्ध अल्कोहल (Chemical Compound) में बदल जाता है। यह कोई मीठा शर्बत या चीनी का अर्क नहीं रह जाता जिसे मधुमक्खियां अपना भोजन समझें।

इसके उलट, पेट्रोल और अल्कोहल की तीखी गंध से मधुमक्खियां और अन्य कीट दूर भागते हैं। यदि कभी किसी वास्तविक पेट्रोल पंप के आसपास मधुमक्खियां दिखती भी हैं, तो उसके पीछे वहां कोई स्थानीय छत्ता होना, आसपास के विशेष फूल-पौधे या पर्यावरण से जुड़े अन्य कारण हो सकते हैं, न कि पेट्रोल की टंकी में मौजूद एथेनॉल।

अफवाहों से बचें, तकनीकी और वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित है ईंधन

इस तरह के भ्रामक वीडियो का मकसद केवल आम उपभोक्ताओं के मन में नए ईंधन को लेकर संशय पैदा करना है। सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ पहले ही साफ कर चुके हैं कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे वाहनों के इंजन या पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। तकनीकी रूप से अपरिपक्व और एआई द्वारा गढ़े गए ऐसे वीडियो पर भरोसा करने से पहले उनकी सत्यता जांचना बेहद जरूरी है। इंटरनेट पर दिखने वाली हर चमकती चीज हकीकत नहीं होती, और यह 'मधुमक्खी कांड' इसका सबसे ताजा उदाहरण है।

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